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विदेश यात्रा पर अब 1000 डॉलर ज्यादा

May 042010
 

भारतीय रिजर्व बैंक धीरे-धीरे रुपए को पूंजी खाते में परिवर्तनीय बढ़ाने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। इसके तहत एक तो उसने तय किया है कि अब विदेशी यात्रा पर जाने पर कोई भारतीय नागरिक 2000 डॉलर के बजाय 3000 डॉलर ले सकता है। यह रकम लीबिया, इराक, ईरान, रूसी संघ और सीआईएस देशों के लिए पहले से 5000 ड़ॉलर है जिसे जस का तस रखा गया है। दूसरे, अभी तक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) में किसी भारतीय कंपनी या प्रवर्तक द्वारा अनिवासी भारतीय, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई), विदेशी नागरिक और ओसीबी (विदेशी कॉरपोरेट निकाय) को शेयर बेचने का प्रावधान नहीं था। लेकिन अब ओसीबी के अलावा इनमें से बाकी सभी को शेयर बेचे जा सकते हैं।

अभी तक लिस्टेड कंपनी के शेयर का बिक्री मूल्य स्टॉक एक्सचेंजों में उस समय के बाजार भाव को माना जाता है। लेकिन अब तय हुआ है कि बिक्री मूल्य शेयरों के प्रेफरेंशियल आवंटन से जुडे सेबी के दिशानिर्देश से तय होंगे। यानी बिक्री मूल्य स्टॉक एक्सचेंजों में पिछले छह महीने के दौरान कंपनी के शेयरों के उच्चतम-न्यूनतम मूल्य के औसत या पिछले दो हफ्तों के न्यूनतम-उच्चतम मूल्य के औसत में से जो भी ज्यादा हो, उससे कम नहीं होना चाहिए। अनलिस्टेड शेयरों की बिक्री में पहले उचित मूल्य तय करने का जिम्मा प्रमाणित चार्टर्ड एकाउंटेंट (सीए) पर था। अब यह काम सेबी में पंजीकृत कैटेगरी-1 मर्चेंट बैंकर या सीए से करवाना होगा।

रिजर्व बैंक ने यह भी तय किया है कि अगर कोई विदेशी निकाय या व्यक्ति भारतीय नागरिक या कंपनी को शेयर बेचता है तो उसकी प्रक्रिया क्या होगी और उसमें बिक्री मूल्य कैसे तय किया जाएगा। लिस्टेड कंपनी के लिए अभी तक बिक्री मूल्य को स्टॉक एक्सचेंजों में शेयर के तत्कालीन भाव को माना गया है और यह बिक्री सेबी के पास पंजीकृत मर्चेंट बैंकर या ब्रोकर के जरिए हो सकती है। अगर मर्चेंट बैंकर या ब्रोकर की मदद लिए गए बगैर ये शेयर बेचे जाते हैं तो बिक्री मूल्य एक हफ्ते के उच्चतम-न्यूनतम भाव के औसत से 5 फीसदी ऊपर-नीचे हो सकता है। लेकिन विदेशी निकाय द्वारा अब लिस्टेड कंपनी के शेयरों की बिक्री का मूल्य प्रेफरेंशियल आवंटन पर सेबी के दिशानिर्दश से तय होगा। अनलिस्टेड कंपनी के लिए मूल्य का निर्धारण कैटेगरी-1 मर्चंट बैंकर या प्रमाणित चार्टर्ड एकाउंटेंट को करना होगा।

इस बीच सरकार की तरफ से जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2009-10 में देश में एफडीआई के प्रवाह में 5.16 फीसदी की कमी आई है। 2008-09 में यह 27.30 अरब डॉलर था। लेकिन 2009-10 में यह घटकर 25.89 अरब डॉलर रह गया। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के प्रमुख अर्थशास्त्री डी के जोशी का कहना है कि पिछले साल दुनिया में जिस तरह हालात थे, उसे देखते हुए एफडीआई के प्रवाह को सम्मानजनक ही कहा जाएगा।

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