निफ्टी की दशा-दिशा [बुधवार 20 मार्च 2019] शुरुआती रुख⬇ सुबह: 8.10 बजे

पिछला बंद कल का उच्चतम कल का न्यूनतम कल का बंद संभावित दायरा
11462.20 11543.85 11451.25 11532.40 11465/11555

 

अर्थ-संहिता

अर्थव्यवस्था में भारत का पारंपरिक ज्ञान और अभी तक समानांतर रूप से चल रहे तौर-तरीके

Apr 132011
 
दलाल स्ट्रीट और हार्निमन सर्कल का वो बरगद

आज बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) और दलाल स्ट्रीट पर्यायवाची हो गए हैं। यहां तक कि पूरे भारतीय शेयर बाजार को अमेरिका के वॉल स्ट्रीट की तर्ज पर दलाल स्ट्रीट कहा जाता है। देश के इस सबसे पुराने स्टॉक एक्सचेंज का जन्म 1875 में एक एसोसिएशन के रूप में हुआ था, जिसका नाम था – नेटिव […]

Apr 092011
 

काम ही राम है। केवल चार शब्दों की इस नन्हीं मुन्हीं कहावत में प्रागैतिहासिक युग से भी बहुत पहले की झांकी मिल जाती है कि किसी ईश्वरीय चमत्कार से मनुष्य मनुष्य नहीं बना बल्कि वह मेहनत और काम का ही करिश्मा है कि उसने मनुष्य के अगले दो पांवों को हाथों में तब्दील कर दिया […]

Sep 052010
 

रुपया शब्द की उत्पत्ति संस्कृत भाषा के शब्द ‘रौप्य’ से हुई है, जिसका अर्थ होता है, चांदी। भारतीय रुपये को हिंदी में रुपया, गुजराती में रुपयो, तेलगू व कन्नड़ में रूपई, तमिल में रुबाई और संस्कृत में रुप्यकम कहा जाता है। लेकिन बंगाली व असमिया में टका/टॉका और ओड़िया में टंका कहा जाता है। भारत […]

May 042010
 

आप सुबह-सुबह फल या सब्जी के किसी थोक बाजार में चले जाएं वहां आपको खरीदार और विक्रेता हाथ को रूमाल से ढंककर सौदे करते हुए मिल जाएंगे। आप ऊपर-ऊपर देखकर समझ ही नहीं सकते कि आखिर हो क्या रहा है। असल में फल और सब्जी के थोक बाजार में इसे रूमाली सौदा कहते हैं और […]

Apr 242010
 

केरल के एरनाकुलम ज़िले में पारावूर तालुका का एक छोटा-सा कस्बा है चेन्नामंगलम। यह एरनाकुलम से करीब 42 किलोमीटर दूर है। तीन नदियों व पहाड़ियों से घिरा है यह हरे-भरे मैदानों से भरा इलाका। उत्तरी पारावूर के इस इलाके में एक सालाना मेला लगता है जिसे मट्टा चांदा कहते हैं। यह मेला ग्राहकों को खींचने […]

Apr 082010
 

इस समय देश भर में जीएसटी (माल व सेवा कर) लागू करने की तैयारियां चल रही हैं। अगले साल 1 अप्रैल 2011 से इसे अपनाने की घोषणा वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी इस साल के आम बजट में कर चुके हैं। कर की समान दरों के बारे में तरह-तरह के प्रस्ताव आ रहे हैं। कोई कहता […]

Mar 312010
 

हम भारतीय किसी भी तरह के ऋण से फौरन बरी होना चाहते हैं। यह हमारी परंपरागत नैतिकता का हिस्सा है। भारतीय संस्कृति में माना जाता है कि हर व्यक्ति पर कुछ न कुछ ऋण होते हैं। जैसे, मातृ ऋण, पितृ ऋण, गुरु ऋण। इसी तरह महात्मा गांधी का मानना था कि हर व्यक्ति पर समाज […]

Mar 302010
 

यह विनोबा भावे द्वारा ऋगवेद के अध्ययन के बाद लिखे गए ऋगवेद सार: का एक मंत्र है। इसका शाब्दिक अर्थ है – लड़के के लिए माताएं वस्त्र बुन रही हैं। पूरी व्याख्या विनोबा जी ने कुछ इस तरह लिखी है। प्राचीन काल में पुरुष खेती का काम करता था और स्त्री घर में बुनती थी। […]

Mar 292010
 

इस बार के बजट में कर प्रस्तावों को पेश करते वक्त वित्त मंत्री प्रणब ने कौटिल्य का एक वाक्य उद्धृत किया था कि एक बुद्धिमान महा-समाहर्ता राजस्व संग्रह का काम इस प्रकार करेगा कि उत्पादन और उपभोग पर नुकसानदेह असर न पड़े… वित्तीय समृद्धि दूसरी बातों के साथ लोक समृद्धि, प्रचुर पैदावार और व्यवसाय की […]