किताबों से लेकर बिजनेस स्कूलों तक में पढ़ाया जाता है कि संभावनामय व मूलभूत रूप से मजबूत कंपनियों में ही निवेश करना चाहिए। यह भी कहा जाता है कि सस्ते में खरीदो और महंगे में बेचो। लेकिन सबसे अहम मुद्दा है यह पता लगाना कि कोई मजबूत संभावनामय कंपनी सस्ते में मिल रही है या [...]
शेयर बाजार
शेयर बाजार में सीधे निवेश करने की जरूरी समझ क्योंकि यहां जोखिम सबसे ज्यादा है तो रिटर्न भी हैं सबसे अधिक
एक्साइड ठहरा है, पकड़ लें लपककर
हमने इसी जगह करीब सवा साल पहले 13 जनवरी 2011 को अमारा राजा बैटरीज में निवेश की सलाह दी थी। तब उसका शेयर 185 रुपए पर चल रहा था। कल, 23 अप्रैल 2012 को 4.06 फीसदी गिरने के बावजूद वो 302.20 रुपए पर बंद हुआ है। इस बीच यह बहुत नीचे गया तो 30 दिसंबर [...]
आइम्को इलेकॉन पर फिर बोले घंटाल
बाजार इस हफ्ते दायरे में बंधकर चलेगा। पहले निफ्टी 5230 से 5340 का दायरा तोड़े, तभी आगे की दिशा साफ हो सकती है। यह कहना है जानकारों का। लेकिन जीवन की तरह शेयर बाजार भी किसी फिल्म या सीरियल की स्क्रिप्ट नहीं है कि कम से कम लिखनेवाले को आगे का पता हो। यहां तो [...]
कर्मों से मिले मूल्य, पूछताछ से भाव
मूल्य वो है जो कंपनी के कर्मों से बनता है और भाव वो है जो लोग उसे देते हैं। खरीदने-बेचने वाली शक्तियों के असल संतुलन से ही निकलता है भाव। हो सकता है कि कंपनी बहुत अच्छा काम कर रही हो। उसका धंधा बढ़ रहा हो। लाभप्रदता भी बढ़ रही हो। फिर भी बाजार के [...]
गार का मारा कॉक्स एंड किंग्स बेचारा
इस बार के बजट में घोषित गार (जनरल एंटी एवॉयडेंस रूल) की ऐसी मार दुनिया की सबसे पुरानी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जानीमानी, टूर व ट्रैवेल कंपनी कॉक्स एंड किंग्स पर पड़ी है कि उसका शेयर हर दिन दबता ही चला जा रहा है। कल, 19 अप्रैल 2012 को उसने 139 रुपए पर 52 हफ्ते की [...]
कच्चे तेल का कंटक और कैस्ट्रॉल
कैस्ट्रॉल इंडिया का शेयर इस साल जनवरी से लेकर कल तक 26.76 फीसदी बढ़ चुका है। इसी दौरान सेंसेक्स 12.08 फीसदी बढ़ा है। लेकिन कैस्ट्रॉल शायद बाजार से आगे रहने का यह क्रम आगे जारी न रख सके। कारण, तीन दिन पहले सोमवार को घोषित मार्च तिमाही के उसके नतीजे अच्छे नहीं रहे हैं। इस [...]
वीएसटी टिलर्स में है दोगुनी संभावना
अजीब विरोधाभासों से भरा देश है अपना। यहां की 60 फीसदी से ज्यादा श्रमशक्ति कृषि पर निर्भर है। लेकिन खेतों में काम करने के लिए मजदूर नहीं मिलते। मिलें भी तो कैसे? जहां 80 फीसदी से ज्यादा किसानों के पास ढाई एकड़ से कम जमीन हो और देश में जोतों का औसत आकार दस साल [...]
बड़े किलर जीन्स हैं केवल किरण के
बहुत साफ-सी बात है कि मूल्य सामाजिक लेनदेन का पैमाना है। मूल्य किसी चीज को उतना ही मिलता है, जितना लोग उसे भाव देते हैं। और, लंबे समय तक भाव पाने के लिए उस चीज की अपनी औकात और दमखम होना जरूरी है। हम लंबे समय में फलने-फूलनेवाली ऐसी ही सामर्थ्यवान और संभावनामय कंपनियां आपके [...]
जुआरी पे लगे दांव पर घबराना क्या!
जुआरी इंडस्ट्रीज 1967 में बनी के के बिड़ला समूह की कंपनी है। वो समूह जो हिंदुस्तान टाइम्स व मिंट जैसे अखबार भी निकालता है। इसके बारे में हमने सबसे पहले इसी जगह 6 जनवरी 2011 को लिखा था। तब इसका दस रुपए का शेयर 690 रुपए के आसपास चल रहा था। करीब तीन महीने में [...]
खोला पेज़, निकली चड्ढी जॉकी की
पहले लंगोटी हुआ करती थी। कहा जाता था कि भागते भूत ही लंगोटी ही भली। लंगोटी फिर चड्ढी हो गई। और, अब चड्ढी में भी तमाम ब्रांड हो गए। लोकल से लेकर ग्लोबल तक। अमेरिका का ऐसा ही ब्रांड है जॉकी। देखे होंगे आपने इसके विज्ञापन। अमेरिकी कंपनी जॉकी इंटरनेशनल के इस ब्रांड को भारत, [...]



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