निफ्टी की दशा-दिशा [बुधवार 23 जनवरी 2019] शुरुआती रुख⬆ सुबह: 8.10 बजे

पिछला बंद कल का उच्चतम कल का न्यूनतम कल का बंद संभावित दायरा
10961.85 10949.80 10864.15 10922.75 10875/10965

 

तथास्तु

यह शेयर बाज़ार में लंबे समय के निवेश की सेवा है।

ट्रेडिंग है बिजनेस, निवेश ऐसा नहीं

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Jan 202019
 

किसी अन्य व्यापार की तरह शेयर बाज़ार की ट्रेडिंग भी एक बिजनेस है। उसका सारा जोखिम हमें खुद उठाना पड़ता है। उस पर टैक्स भी बिजनेस जैसा लगता है। वहीं, लंबे समय के निवेश में हम खुद बिजनेस नहीं करते, बल्कि दूसरों द्वारा किए जा रहे संभावनामय बिजनेस पर दांव लगाते हैं। उसके मालिकाने का […]

अच्छा जब सस्ता भी हो जाए तो!

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Jan 132019
 
अच्छा जब सस्ता भी हो जाए तो!

शेयर बाज़ार में अच्छी कंपनियों की कमी नहीं है। आम तौर पर नाम व काम के दम पर उनके शेयर काफी महंगे होते हैं। लेकिन कभी-कभी खराब आर्थिक हालात या कंपनी के कामकाज में तात्कालिक समस्याओं से उपजी निराशा के चलते उनके शेयर गिरकर ज़मीन पर आ जाते हैं। ऐसे वक्त में इन कंपनियों के […]

Jan 062019
 
भावों के जाल में उलझा है मूल्य

समाज है तो बाज़ार है। बाज़ार है तो हर वस्तु या सेवा का मूल्य है। आमतौर पर बाज़ार में किसी सेवा या वस्तु का मूल्य ठीक उस समय उसकी मांग व सप्लाई के संतुलन को सटीक रूप से दिखलाता है। लेकिन शेयर बाज़ार में असली मूल्य अमूमन वर्तमान भावों में नहीं झलकता क्योंकि वे भविष्य […]

Dec 302018
 
लालच के छल्लों से बचना ज़रूरी

पुराना साल गया। नए साल में लालच के छल्ले फेंकने का दौर चालू है। ब्रोकर दस-बीस स्टॉक उछालकर उनमें साल भर में 20-30% कमाई का दावा कर रहे हैं। लेकिन गौर करें तो ये सभी स्टॉक्स पहले से काफी बढ़ चुके हैं। यह है आम दृष्टि के दोहन का फॉर्मूला क्योंकि लोगबाग चढ़े-बढ़े हुए के […]

Dec 232018
 
शोर से अच्छे निवेश पर फर्क नहीं

बाज़ार में बहुत शोर है। अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ते पर विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक देश से भागते रहे तो क्या होगा? लोकसभा चुनावों में मोदी का जादू नहीं चला तो! शेयर बाज़ार मंदी की गिरफ्त में आ गया तो! लेकिन इस सारे शोर और सवालों के बीच हमारे जीवन और भारतीय अर्थव्यवस्था पर ज्यादा फर्क […]

Dec 162018
 

बचपन, जवानी, बुढ़ापा और मौत। जीवन के इस चक्र में इंसान सबसे ज्यादा मूल्यवान अपनी जवानी में होता है। तमाम कंपनियां भी ऐसे ही चक्र से गुजरती हैं। लेकिन कुछ कंपनियां वक्त की नब्ज़ और ज़रूरत से ऐसी जुड़ती हैं कि बहुत लंबा जीवन जीती हैं। सालों-साल बाद भी वे एकदम जवान रहती हैं। ऐसी […]

Dec 092018
 
बड़ों की पूछ, छोटों का पुछत्तर नहीं

शेयर बाज़ार पर मुठ्ठीभर कंपनियों का दबदबा बढ़ता जा रहा है। बाज़ार के कुल कारोबार में शीर्ष 50 कंपनियो का हिस्सा बढ़कर 58% हो चुका है। वहीं, शीर्ष की 100 कंपनियों की बात करें तो उनका हिस्सा 75% हो चुका है। साल भर पहले तक स्थिति इतनी विषम नहीं थी। आज अच्छी-खासी मजबूत छोटी कंपनियों […]

Nov 252018
 
दबाव का चक्र यकीनन टूटेगा

हालात कितनी तेज़ी से बदलते हैं! छह महीने पहले तक शेयर बाज़ार चमाचम था। सभी निवेशक मस्त थे। लेकिन आज अधिकांश निवेशक रो रहे हैं। खासकर, स्मॉलकैप कंपनियों के निवेशक ज्यादा ही दुखी हैं। पिछले छह से नौ महीनों में इनके शेयरों को काफी चोट लगी है। इसकी खास वजह है कि इधर इनके धंधे […]

Nov 182018
 
हानिकारक होते हैं वेल्थ मैनेजर!

तमाम बैंक वेल्थ मैनेजमेंट की बात करते हैं। वे बड़े ग्राहकों के लिए वेल्थ या रिलेशनशिप मैनेजर तक तय कर देते हैं। लेकिन हकीकत में ऐसे वेल्थ मैनेजर ग्राहकों की दौलत बढ़ाने के बजाय बैंकों का ही धंधा बढ़ाने का काम करते हैं। ऐसा वे ग्राहकों के हितों की कीमत पर करते हैं। बैंक के […]

Nov 112018
 
घबराहट में बेचना सरासर गलत

कुछ हफ्ते या महीने भर बाद शेयर बाज़ार कहां जाएगा, इसे बता पाना किसी के लिए भी संभव नहीं। हो सकता है कि बाज़ार गिरता जाए या ऊपर चढ़ जाए। पर एक बात गांठ बांध लें कि घबराहट में अपना पोर्टफोलियो खाली नहीं करना चाहिए। अगर आपने किसी कंपनी की मूलभूत मजबूती व संभावना को […]