निफ्टी की दशा-दिशा [बुधवार 9 अगस्त 2017] शुरुआती रुख⬇ सुबह: 8.05 बजे

पिछला बंद कल का उच्चतम कल का न्यूनतम कल का बंद संभावित दायरा
10057.40 10083.80 9947.00 9978.55 9935/9995

तथास्तु

यह शेयर बाज़ार में लंबे समय के निवेश की सेवा है।

मूल्य से बने मुद्रा, नहीं तो माया

 Posted by at 05:45  Comments Off on मूल्य से बने मुद्रा, नहीं तो माया
Aug 132017
 

रुपया, अमेरिकी डॉलर या यूरोपीय यूरो। अपने-आप में इन मुद्राओं का कोई मूल्य नहीं। वास्तव में वो महज कागज का टुकड़ा हैं, माया हैं। उनका मूल्य इससे बनता है कि उनमें माल या सेवा खरीदने की कितनी औकात है। इसी तरह कंपनी में निवेश करते वक्त हमें सिर्फ यही नहीं देखना चाहिए कि उसके शेयर […]

शेयर बाज़ार के टमाटरों से परहेज़

 Posted by at 16:17  Comments Off on शेयर बाज़ार के टमाटरों से परहेज़
Aug 062017
 

टमाटर वही, रुपया वही। लेकिन पहले सौ रुपए में दस किलो मिलता था, अब एक किलो। उपयोगिता वही, मूल्य वही। लेकिन भाव चढ़ गया है। मामला सीजनल है। अगले सीजन तक फिर उतर जाएगा। शेयर बाज़ार में बहुत से शेयरों का भी यही हाल है। ऐसे में हमें बहुत सावधानी से वही कंपनियां चुननी चाहिए […]

बाज़ार के चार चक्रों की अलग चाल

 Posted by at 16:59  Comments Off on बाज़ार के चार चक्रों की अलग चाल
Jul 302017
 

शेयर बाज़ार मुख्यतः चार दौर या चक्र से गुजरता है: निराशा, संशय, आशा और उन्माद। निराशा के दौरान जमकर खरीदना और एकदम नहीं बेचना चाहिए। संशय के दौरान संभलकर खरीदना और थोड़ा-थोड़ा बेचकर मुनाफा बनाना चाहिए। आशा के दौर में सावधानी से खरीदना और बराबर बेचकर मुनाफा निकालना चाहिए। वहीं, उन्माद के दौर में जमकर […]

हड़बड़ी नहीं, बेहतर होगा इंतज़ार

 Posted by at 11:43  Comments Off on हड़बड़ी नहीं, बेहतर होगा इंतज़ार
Jul 232017
 

पच्चीस साल पहले शेयर बाज़ार में ऐसी ही गहमागहमी थी। हर तरफ हर्षद मेहता का जलवा था। कहते थे कि जिसे वो हाथ लगाए, सोना बन जाए। लेकिन जब वो हीरो से ज़ीरो बना तो लाखों निवेशकों व ट्रेडरों की बचत स्वाहा हो गई। सबक यह कि चढ़े हुए बाज़ार के पीछे भागना ठीक नहीं। […]

अर्थव्यवस्था दक्खिन, बाज़ार उत्तर!

 Posted by at 11:35  Comments Off on अर्थव्यवस्था दक्खिन, बाज़ार उत्तर!
Jul 162017
 

आगे का पता नहीं। लेकिन फिलहाल अपनी अर्थव्यवस्था की हालत पतली है। जनवरी-मार्च में जीडीपी की वृद्धि दर पांच तिमाही से गिरते-गिरते 6.1% पर आ गई। मई में औद्योगिक उत्पादन मात्र 1.7% बढ़ा है, जबकि साल भर पहले यह 8% बढ़ा था। फिर भी शेयर बाज़ार नए शिखर पर! ऐसे में आंख मूंदकर और लालच […]

फूलता इक्विटी स्कीमों का गुब्बारा

 Posted by at 13:23  Comments Off on फूलता इक्विटी स्कीमों का गुब्बारा
Jul 092017
 
फूलता इक्विटी स्कीमों का गुब्बारा

म्यूचुअल फंडों की इक्विटी स्कीमों में निवेशकों की संख्या जून अंत तक 421.7 लाख के नए रिकॉर्ड पर जा पहुंची। ऐसी स्कीमों में निवेशकों की संख्या का पिछला रिकॉर्ड मार्च 2009 में 411.3 लाख का था। लेकिन तब और अब में बहुत फर्क है। तब बाज़ार ऐतिहासिक तलहटी पर था, जबकि अभी ऐतिहासिक शिखर पर। […]

बाज़ार गिरना है तो हड़बड़ी क्यों!

 Posted by at 12:04  Comments Off on बाज़ार गिरना है तो हड़बड़ी क्यों!
Jul 022017
 

शेयर बाज़ार का प्रतिनिधित्व करनेवाला बीएसई सेंसेक्स इस समय 22.64 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा है। यह कमोबेश वही स्तर है जिसके बाद 2008 में बाज़ार धड़ाम से गिर गया था। इससे ज्यादा मूल्यांकन वो 2000 में गया था, जिसके बाद डॉटकॉम का बुलबुला फूटा था। साफ है कि इस बार भी देर-सबेर […]

आईपीओ की भरमार, आगे खतरा!

 Posted by at 05:05  Comments Off on आईपीओ की भरमार, आगे खतरा!
Jun 252017
 

बाज़ार में आईपीओ की भरमार है। कंपनियां छोटे-बड़े निवेशकों से 1000 करोड़ रुपए जुटा चुकी हैं। आगे 5000 करोड़ रुपए तक जुटा सकती हैं। डीमार्ट के निवेशकों की मौज चल रही है। हो सकता है कि सीडीएसएल में भी ऐसा हो जाए। करीब दस साल पहले 2007-08 में भी ऐसा ही माहौल था। याद करें। […]

उफान ज्यादा लंबा नहीं खिंचेगा

 Posted by at 11:11  Comments Off on उफान ज्यादा लंबा नहीं खिंचेगा
Jun 182017
 

दूध उबलता है दस मिनट तो उफनता है बमुश्किल 10-15 सेकंड। फिर पानी के छींटे मारने या लौ से हटा लेने पर सम जाता है। इसी तरह मानकर चलें कि हमारे शेयर बाज़ार का मौजूदा उफान ज्यादा लंबा नहीं खिंचेगा। अमेरिकी केंद्रीय बैंक ने सिस्टम में डाले गए अतिरिक्त नोटों को खींचने का फैसला कर […]

लालच पर लगाम, फलेगा निवेश

 Posted by at 12:21  Comments Off on लालच पर लगाम, फलेगा निवेश
Jun 112017
 

पिछले कुछ हफ्तों से शेयर बाज़ार में विदेशी संस्थाएं बराबर बेच रही हैं, जबकि हमारे म्यूचुअल फंड बराबर खरीदे जा रहे हैं। कारण, आम निवेशक इनमें धन लगा रहे हैं तो खरीदना उनकी मजबूरी है। यह बराबर होता है कि जब बाज़ार शिखर पर होता है तभी रिटेल निवेशक उस ओर दौड़ते हैं। महंगा निवेश […]