किसी से इतना मत जुड़ो कि लगे कि उसके बिना जी नहीं सकते। लेकिन इतना दूर भी न रहो कि लगे कि निपट अकेले हो गए हो। दुनिया तो किसी न किसी के साथ ही कटती है। लेकिन मुक्ति अकेले में मिलती है।
सुखी हैं, संपन्न हैं। लेकिन खुश कौन है? जो जितना मुक्त है, उतना खुश है। और, किसी चीज को जान लेना उससे मुक्त हो जाना है। इस हद तक जान लेना कि सवालों से निकलने वाली हर कड़ी सुलझ जाए।
कभी जमीन पर जीत मायने रखती थी। राज और राजा का जमाना था। लेकिन आज तो सारी लड़ाई दिमाग पर कब्जे की है। हर कोई इसी में लगा है। जो जितने ज्यादा दिमाग जीत लेगा, वह उतना बड़ा सम्राट है।
सारी लिस्टेड मीडिया कंपनियों को बताना होगा कि कॉरपोरेट क्षेत्र के साथ उन्होंने किस तरह की ‘प्राइवेट ट्रीटी’ कर रखी है। पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी ने प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया की सहमति ने यह नियम बना दिया है। सेबी का कहना है कि बहुत सारे मीडिया समूहों ने कंपनियों के साथ गठबंधन कर रखे [...]
जुमे का दिन है, शुक्रवार है। लोकसभा ने सांसदों के वेतन को तीन गुना बढ़ाने और प्रमुख भत्तों को दोगुना करने का विधेयक पास कर दिया। सांसद गदगद हैं, मस्त हैं। लेकिन पिछले शुक्रवार को जब उन्होंने इसके लिए संसद में गदर मचा रखी थी, उसी दिन भारत के नियंत्रक व महालेखा परीक्षक (सीएजी, कैग) [...]
जानने की पहली सीढ़ी है सवाल। जिसके पास भी सवाल होंगे, उसे उनका जवाब मिल जाएगा। सब कुछ है इस दुनिया में। हां, इतना जरूर है कि यहां कुछ भी पाने से पहले उसकी पात्रता हासिल करनी पड़ती है।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने गुरुवार को नए प्रत्यक्ष कर विधेयक को मंजूरी दे दी है। अब इसे सोमवार 30 अगस्त को संसद में पेश किया जाएगा, जहां आम राजनीतिक सहमति को देखते हुए इसके फौरन पास हो जाने की उम्मीद है। वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी के मुताबिक विधेयक में व्यक्तिगत आय की करमुक्त सीमा को 1.6 [...]



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