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वाणिज्य मंत्रालय की पहल के चलते निर्यातकों को अपने धंधे की लागत 45 करोड़ डॉलर कम करने में मदद मिली है। वाणिज्‍य व उद्योग राज्‍यमंत्री ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया ने दावोस में बुधवार को वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में एक पैनल चर्चा के दौरान यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मंत्रालय के कदमों से निर्यातकों के लिए लेन-देन [...]

 

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने चीनी क्षेत्र को नियंत्रण-मुक्त करने के मुद्दे पर एक विशेषज्ञ समिति बना दी है। इसकी अध्यक्षता उनकी आर्थिक सलाहकार परिषद के चेयरमैन डॉ. सी रंगराजन को सौंपी गई है। समिति में वित्त मंत्रालय के मुख्य आर्थिक सलाहकार कौशिक बसु, कृषि लागत व मूल्य आयोग (सीएसीपी) के चेयरमैन अशोक गुलाटी और प्रधानमंत्री [...]

 

अमेरिका ने अपने रक्षा बजट में अगले दस सालों के दौरान 488 अरब डॉलर की कटौती की घोषणा की है। साथ ही अगले पांच साल में थल सेना में करीब 70,000 और मरीन कोर में 22,000 सैनिक घटाए जाएंगे। इसके अलावा युद्धपोतों को भी रिटायर किया जाएगा। 9 सितंबर 2001 के हमले के बाद अमेरिका [...]

 

लंदन ओलम्पिक की आयोजन समिति ने ऐलानिया तौर पर कहा है कि डाउ केमिकल्स को अपने प्रायोजक के रूप में हटाने का उसका कोई इरादा नहीं है। बता दें कि डाउ केमिकल्स उस अमेरिकी कंपनी यूनियन कार्बाइड कॉरपोरेशन का नया नाम है जिसकी भारतीय इकाई की लापरवाही ने दुनिया में अब तक के सबसे बड़े [...]

 

आज, शुक्रवार को डॉलर की विनिमय दर दोपहर ढाई बजे के आसपास 49.44 रुपए तक चली गई। याद कीजिए कि दिसंबर 2011 में मैंने रुपए के बारे में क्या कहा था। मैंने कहा था कि रुपया जनवरी में ही डॉलर के सापेक्ष 50 से नीचे चला जाएगा, जबकि दिग्गज लोग लिखित रिपोर्ट जारी कर रहे [...]

 

बीमा कारोबार को निजी क्षेत्र के लिए खोले हुए दस साल से ज्यादा हो चुके हैं। लेकिन साधारण बीमा ही नहीं, जीवन बीमा तक में अभी तक सरकारी कंपनियों का दबदबा है। बीमा नियामक संस्था, आईआरडीए (इरडा) की तरफ से जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक चालू वित्त वर्ष 2011-12 में अप्रैल से दिसंबर तक के [...]

 

ज़िंदगी कभी एकसार नहीं हो सकती। उसमें उतार-चढ़ाव आते ही हैं। इसी तरह शेयर बाजार और अलग-अलग शेयरों के साथ उतार-चढ़ाव बड़ा स्वाभाविक है। यहां से कमाने के लिए बड़ा धैर्य रखना पड़ता है। खासकर तब, मामला लांग टर्म या लंबे समय का है। हमने इसी कॉलम में ग्रेफाइट इंडिया के बारे में सबसे पहले [...]

 

काम अपने लिए करने जाते हैं, पर करना दूसरों के लिए पड़ता है तो धीरे-धीरे हम खुद ही निर्वासित हो जाते हैं। फिर जो है, उसे बचाने के चक्कर में निर्वासन खिंचता जाता है और ज़िंदगी ही चुक जाती है।

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