अमेरिका और यूरोप के बड़े बाजारों में खराब आर्थिक हालात के बावजूद भारत ने 2011-12 के दौरान 300 अरब डॉलर से अधिक का निर्यात किया है। देश का निर्यात पहली बार 300 अरब डॉलर के पार गया है। वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा ने शुक्रवार को राजधानी दिल्ली में मीडिया को बताया, ‘‘मुझे यह घोषणा करते [...]
देश में बिजली की स्थापित क्षमता 2,00,287 मेगावॉट हो गई है। इसमें ताजा योगदान हरियाणा के झज्जर में शुरू हुए 660 मेगावॉट के बिजली संयंत्र का है। इससे पहले 31 मार्च 2012 तक देश में बिजली की कुल स्थापित क्षमता 1,99,627 मेगावॉट थी। इसमें ताप बिजली की क्षमता 1,32,013 मेगावॉट, पनबिजली की 38,991 मेगावॉट, परमाणु [...]
देश में तकनीकी शिक्षा की शीर्ष नियामक संस्था, ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एडुकेशन (एआईसीटीई) माइक्रोसॉफ्ट की क्लाउड कंप्यूटिंग सेवा के लिए अब तक की सबसे बड़ी ग्राहक बन गई है। क्लाउड कंप्यूटिंग एक ऐसा सॉफ्टवेयर है जिसे इंटरनेट के जरिए ग्राहकों को उपलब्ध कराया जाता है। बिल गेट्स की कंपनी माइक्रोसॉफ्ट ने गुरुवार को [...]
ज्यादातर विश्लेषकों को उम्मीद थी कि इनफोसिस की आय नए वित्त वर्ष में डॉलर के लिहाज से 10 से 15 फीसदी बढ़ जाएगी। लेकिन कंपनी ने जब शुक्रवार को यूरोप व अमेरिका की सही हालत के हिसाब से घोषित किया कि उसकी आय 8 से 10 फीसदी बढ़कर 755 करोड़ डॉलर से 769 करोड़ डॉलर [...]
पुणे के खडकी कैंटोनमेंट इलाके में सेना की 2.61 लाख वर्गफुट जमीन पर रिटायरमेंट के बाद राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल के लिए बन रहे भव्य आवास पर राष्ट्रपति भवन ने लंबी-चौड़ी सफाई दी है। उसका कहना है कि, “पुणे में लिया जाना वाला यह वर्तमान आवास एक घर है जिसमें पहले लेफ्टिनेंट कर्नल स्तर [...]
अकेले इनफोसिस में इतना दम है कि वह पूरे बाजार को दबाकर बैठा सकता है। शुक्रवार को यह बात साबित हो गई। सेंसेक्स 238.11 अंक गिर गया, जिसमें से 201.82 अंक का योगदान अकेले इनफोसिस का था। वह भी तब, जब सेंसेक्स में इनफोसिस का योगदान 8.18 फीसदी है। सेंसेक्स में रिलायंस इंडस्ट्रीज का योगदान [...]
पहले लंगोटी हुआ करती थी। कहा जाता था कि भागते भूत ही लंगोटी ही भली। लंगोटी फिर चड्ढी हो गई। और, अब चड्ढी में भी तमाम ब्रांड हो गए। लोकल से लेकर ग्लोबल तक। अमेरिका का ऐसा ही ब्रांड है जॉकी। देखे होंगे आपने इसके विज्ञापन। अमेरिकी कंपनी जॉकी इंटरनेशनल के इस ब्रांड को भारत, [...]
जीवन और मृत्यु की शक्तियां बराबर हमें अपनी ओर खींचती रहती हैं। उम्र के एक पड़ाव के बाद मृत्यु हावी हो जाती है। तभी परख होती है हमारी जिजीविषा की कि मृत्यु के जबड़े से हम कितनी ज़िंदगी खींचकर बाहर निकाल लेते हैं। (more…)
