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काहे का गुमान!

Sep 022010
 

किसी अनोखे विचार पर गुमान पालना ठीक नहीं क्योंकि हम विचार को नहीं, विचार हमें चुनता है। आइंसटाइन का नाम गिलबर्ट भी हो सकता था और गैलीलियो का अब्राहम भी। इसलिए नाम नहीं, काम से वास्ता रखो दोस्त!

  2 Responses to “काहे का गुमान!”

Comments (2)
  1. काम की ही पहचान

  2. सत्य वचन … राधे राधे

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