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		<title>घंटे-घंटे के चार्ट पर चढ़ाते गए छज्जा</title>
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		<pubDate>Sun, 05 Feb 2012 02:56:03 +0000</pubDate>
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			<content:encoded><![CDATA[<br/><p>अमेरिका में बेरोज़गारी की दर तीन सालों के न्यूनतम स्तर पर आ चुकी है। डाउ जोन्स मई 2008 के बाद के सर्वोच्च स्तर पर आ चुका है। वह शुक्रवार को 1.2 फीसदी की बढ़त लेकर 12,862.23 पर बंद हुआ है। लेकिन अब वहां करेक्शन आना लाजिमी है। देश में निफ्टी बड़े शान से 5300 का स्तर तोड़कर ऊपर आ चुका है। लगातार तीन दिन से 200 दिनों के मूविंग औसत (डीएमए) से ऊपर टिका है। अरसे से परेशान तेजड़िए बड़ा सुकून महसूस कर रहे हैं। अक्टूबर 2010 में निफ्टी 5399 तक गया था। इसलिए बहुत संभावना इस बात की है कि निफ्टी पहले तो 5400 को पार करेगा और फिर 5480 इसका अगला पड़ाव होगा।</p>
<p>फिर भी हमारा मानना है कि यह रैली इतनी एकतरफा रही है कि इसमें बहुतों को शिरकत करने का मौका नहीं मिल पाया। शुक्रवार को निफ्टी का बंद स्तर साप्ताहिक रूप से सर्वोत्तम है। लेकिन लगता यही है कि टेक्निकल एनालिसिस के घंटे-घंटे के चार्टों को आधार बनाकर बाजार को ऊंचा-ऊंचा लेने जाने की हरकत की गई है। हम दृढ़ मान्यता है कि चार्टों के दम पर बाजार को इस तरह लंबे समय तक तोड़ना-मरोड़ना संभव नहीं है। यह रैली बहुत चली तो बाजार को ज्यादा से ज्यादा 150 अंक और ऊपर ले जाएगी। महज इतना पाने के लिए हम तो इस रैली में हाथ डालना मुनासिब नहीं समझते।</p>
<p>पिछले सेटलमेंट में 10 फीसदी बढ़ने, 10 फीसदी घटने और फिर ब्रेक आउट के पैटर्न ने 4400 तक का रीतापन पैदा कर लिया है। इसलिए इस बार गिरावट आई तो उसकी मार बड़ी तगड़ी होगी। एक एफआईआई ब्रोकरेज ने ताज़ा-ताज़ा नोट लिख भेजा है कि तेजी का दौर चलता रहेगा। इसने हमें चिंता में डाल दिया और पुराने अनुभवों की रौशनी में देखने पर साफ हो जाता है कि बाजार में करेक्शन अब सन्निकट है।</p>
<p>सेंसेक्स जब 15,500 पर था, तब इसी ब्रोकरेज हाउस ने कहा था कि बाजार 13,000 तक चला जाएगा और डॉलर के सापेक्ष रुपया 58 तक पहुंच जाएगा। दोनों ही बातें नहीं हुईं। बाजार में विदेशी निवेशकों ने 300 करोड़ डॉलर लगा दिए और सेंसेक्स 17,600 को पार कर गया। यह अगस्त 2009 के बाद की सबसे अच्छी रैली है। दिसंबर तक यही ब्रोकर बंधु डाउनग्रेडों की झड़ी लगाकर मूल्यांकन का शिगूफा उछाल रहे थे और दो महीने बाद फरवरी में यही लोग उन्हीं स्टॉक्स को 30 फीसदी बढ़े हुए भावों पर खरीद रहे हैं।</p>
<p>कोई गरदन पकड़कर पूछनेवाला नहीं है तो औरों को छकाने के लिए मनचाहे अनुमान फेंकते रहते हैं। अब ये फिरंगी ब्रोकर सेंसेक्स 17,600 और रुपए के 48.6 तक मजबूत हो जाने के बाद खरीदने का संकेत दे रहे हैं, जबकि बाजार की दिशा पलटने ही वाली है। रिलायंस इंडस्ट्रीज में बायबैक की शुरुआत 845 रुपए पर हुई है। इसमें भी ऊपर जाने की कम गुंजाइश करेक्शन के बहुत जल्दी आने का स्पष्ट संकेत देती है।</p>
<p>ट्रेडरों को हमारी सलाह है कि वे फिलहाल बेहद सावधान रहें। बेचें तो छोटे-छोटे स्टॉप लॉस लगाकर और उन्हीं स्टॉक्स को खरीदें जिनमें कोई ट्रिगर हो। आपको इस मुकाम पर सही व ईमानदार सलाह देनेवालों को पकड़ने की जरूरत है। आंख मूंदकर ट्रेडिंग करने से बचें। हर तरफ से टिप्स उड़ी चली जा रही हैं। उनके चक्कर में फंसना बेहद खतरनाक है। जहां तक संभव हो, सभी शॉर्ट सौदों को कुछ लांग सौदों से हेज करके चलें।</p>
<p>मूलभूत आर्थिक कारकों में कोई तब्दीली नहीं आई है कि बाजार इतना चढ़ जाता। विधानसभा चुनावों के नतीजे और बजट बिकवाली का संदेशा ला सकते हैं। सीआरआर में कमी से कोई फर्क नहीं पड़ा है। ब्याज दरों में कमी का इंतज़ार अब भी जारी है। सकल मुद्रास्फीति की तरह खाद्य मुद्रास्फीति का आंकड़ा भी अब सप्ताह नहीं, महीने में एक बार आएगा। यानी, बाजार केवल एक बार इसे संज्ञान में ले पाएगा। राजकोषीय घाटा अब भी गंभीर चिंता का मसला बना हुआ है। इसलिए सावधान! झूठी चमक व चाल के फेर में न पड़ें।</p>
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		<title>साध्य नहीं, साधन</title>
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		<pubDate>Sun, 05 Feb 2012 00:45:47 +0000</pubDate>
		<dc:creator>अनिल रघुराज</dc:creator>
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			<content:encoded><![CDATA[<br/><p>अंदर की प्रकृति को बाहर की प्रकृति से मिला देना, प्रकृति के साथ एकाकार हो जाना ही लक्ष्य है। सत्ता और समाज अपने-आप में साध्य नहीं, बल्कि साधन हैं प्रकृति की विपुल संपदा में अपना हिस्सा पाने के।</p>
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		<title>बीसीसीआई से दुखी सहारा ने टीम इंडिया छोड़ी</title>
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		<pubDate>Sat, 04 Feb 2012 16:11:43 +0000</pubDate>
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			<content:encoded><![CDATA[<br/><p>साल 2001 से लेकर बीते ग्यारह सालों में लगातार टीम इंडिया के आधिकारिक प्रायोजक रहे सहारा इंडिया परिवार ने क्रिकेट से ही नाता तोड़ने का फैसला कर लिया है। वह न तो अब भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) से कोई नाता रखेगा और न ही इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में भागादारी करेगा। सहारा ने बीसीसीआई से अनुरोध किया है कि आईपीएल टीम पुणे वॉरियर्स की टीम किसी और को दे दी जाए। सहारा ने वर्ष 2010 में पुणे वॉरियर्स की फ्रैंजाइजी 1702 करोड़ रूपए में खरीदी थी।</p>
<p>शनिवार को आईपीएल की नीलामी से थोड़ी देर पहले सहारा की यह घोषणा बीसीसीआई के लिए किसी सदमे से कम नहीं है। आईपीएल की नीलामी में इस बार करीब 140 राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों की बोली लग रही है। बता दें कि साल 2010 में सहारा इंडिया परिवार ने आख़िरी बार तीन साल के लिए 400 करोड़ रूपए की बोली लगाकर क्रिकेट टीम की स्पांसरशिप ली थी।</p>
<p>सहारा की ओर से जारी बयान में कहा गया है, “हम बीसीसीआई के अधीन आनेवाले सभी तरह के क्रिकेट से हट रहे हैं। प्रायोजक के रूप में 11 वर्ष की यात्रा के बाद हम निश्चित तौर पर कह सकते हैं कि क्रिकेट काफी धनाढ्य हो गया है। कई धनी लोग मजबूत इच्छा के साथ क्रिकेट का समर्थन का हौसला बढ़ाने के लिए मौजूद हैं। इसलिए हम पूरी मानसिक शांति के साथ भारी मन से बीसीसीआई के अंतर्गत आने वाले क्रिकेट से हट रहे हैं।”</p>
<p>सहारा का कहना है, “इस प्रायोजन को शुरू करना हमारा भावनात्मक फैसला था, लेकिन हमारी भावनाओं को कभी नहीं सराहा गया और कई मौकों पर हमारे निवेदन पर कोई विचार नहीं किया गया।” सहारा के बयान में कहा गया है कि अब वो देश में खेलों को बढ़ावा देने के लिए 20 केंद्रों की स्थापना करेंगे। कंपनी हर साल दस करोड़ रुपए ऐसे खेलों और खिलाड़ियों को बढ़ावा देने में लगाएगी जो पीछे छूट गए हैं।</p>
<p>सहारा ने रिश्‍ता टूटने के लिए बीसीसीआई को ज़िम्‍मेदार ठहराया है। उसका कहना है कि साल 2008 में उन्होंने आईपीएल में प्रवेश किया था। लेकिन उन्हें सिर्फ़ एक छोटे-से तकनीकी आधार पर अयोग्य करार दिया गया। पिछले साल आईपीएल के लिए टीम की ख़रीदारी के दौरान 94 मैच और 10 टीमों के हिसाब से पैसा लिया गया। लेकिन सिर्फ 74 मैच खेले गए, जिससे सहारा को नुकसान हुआ। बोर्ड ने नुकसान हुए धन को वापस नहीं किया।</p>
<p>दक्षिण अफ्रीका में विश्व कप आयोजन के दौरान खिलाड़ियों के शर्ट पर सहारा का लोगो नहीं इस्तेमाल किया गया, क्योंकि वो दक्षिण अफ्रीका की सहारा एयरलाइन्स के लोगो से मिलता जुलता था। इस हिसाब से सहारा को दो मैच के लिए फीस नहीं देनी थी, लेकिन इस सबके बावजूद सहारा ने दोनों मैचों के लिए खिलाड़ियों को पूरी रकम अदा की। सहारा ने वर्ल्ड कप की जीत में हीरो रहे युवराज सिंह के प्रति सहानुभूति नहीं दिखाने के लिए बीसीसीआई की आलोचना की है।</p>
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		<title>हट गई चिदंबरम पर लटकी कोर्ट की तलवार, निफ्टी पहुंचेगा 5400 पर!</title>
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		<pubDate>Sat, 04 Feb 2012 15:27:07 +0000</pubDate>
		<dc:creator>अनिल रघुराज</dc:creator>
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		<description><![CDATA[<br/>2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले में केंद्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम को सह आरोपी बनाने की याचिका पटियाला हाउस कोर्ट ने शनिवार को खारिज कर दी। यह याचिका जनता पार्टी के अध्यक्ष सुब्रमण्यम स्वामी ने दायर की थी। स्वामी ने कोर्ट के इस फैसले पर आश्चर्य जताते हुए कहा कि उनके पास 2008 में वित्त मंत्री रहे <a href='http://www.arthkaam.com/chidambaram-no-co-accused-in-2g-scam/16387/'>[...]</a>]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<br/><p>2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले में केंद्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम को सह आरोपी बनाने की याचिका पटियाला हाउस कोर्ट ने शनिवार को खारिज कर दी। यह याचिका जनता पार्टी के अध्यक्ष सुब्रमण्यम स्वामी ने दायर की थी। स्वामी ने कोर्ट के इस फैसले पर आश्चर्य जताते हुए कहा कि उनके पास 2008 में वित्त मंत्री रहे चिदंबरम के ख़िलाफ़ पुख्ता सबूत हैं और वे ट्रायल कोर्ट के इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे।</p>
<p>लेकिन फिलहाल इस फैसले से चिदंबरम से लेकर सरकार व कांग्रेस में बड़ी राहत महसूस की जा रही है। टेलिकॉम मंत्री कपिल सिब्बल ने तो चिदंबरम का इस्तीफा मांगने वालों से माफी की मांग कर दी है। चिदंबरम ने भी कहा कि उन्हें अदालत से ऐसे फैसले की उम्मीद थी, लेकिन उन्होंने अपना इस्तीफा भी तैयार रखा था। वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने फैसले को सरकार के लिए राहत देने वाला बताया। उन्होंने कहा, “इस फैसले से सरकार को राहत मिली है। बेवजह चिदंबरम को दोषी बताने की कोशिश हो रही थी। मैं इस फैसले का स्वागत करता हूं।”</p>
<p>चिदंबरम अगर इस समय भी वित्त मंत्री होते तो शायद सोमवार को शेयर बाजार जबरदस्त उछाल दिखाता। लेकिन इसके बावजूद उम्मीद की जा रही है कि सोमवार को निफ्टी 5400 को पार कर सकता है। शुक्रवार को निफ्टी 5334.85 तक जाने के बाद 5325.85 पर बंद हुआ है। इस तरह निफ्टी 200 दिनों के मूविंग औसत (डीएमए) 5190.05 को निर्णायक रूप से पार कर चुका है। इसलिए जानकारों का कहना है कि पूरी उम्मीद इस बात की है कि सोमवार को निफ्टी 5400 को पार कर देगा और फिर इसकी अगली मंजिल 5480 की होगी। लेकिन शायद वो खुद को लंबे समय पर खुद को उस स्तर पर टिका न पाए।</p>
<p>पटियाला हाउस कोर्ट के न्यायाधीश ओ पी सैनी ने शनिवार को अपने फैसले में कहा कि गृह मंत्री पी चिदंबरम को 2008 में उनके वित्त मंत्री रहने के दौरान हुए टेलिकॉम घोटाले के लिए आपराधिक रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराया जाएगा। उनका कहना था, “किसी जनसेवक द्वारा लिया गया फैसला महज इसलिए आपराधिक नहीं हो जाता कि इससे सरकारी खजाने को नुकसान हुआ है या दूसरों को आर्थिक फायदा हुआ है। बैठकों में भाग लेना और वहां फैसले लेना कोई आपराधिक कृत्य नहीं है। ऑन रिकॉर्ड ऐसी कोई सामग्री नहीं है जो दिखाती हो कि चिदंबरम भ्रष्ट या अवैध नीयत के साथ काम कर रहे थे या उन्होंने अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग किया।”</p>
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		<title>धन का ही मतलब दौलत नहीं होता</title>
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		<pubDate>Sat, 04 Feb 2012 03:35:31 +0000</pubDate>
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		<description><![CDATA[<br/>जहां भी देखो, हर तरफ, हर कोई नोट बनाने में लगा है। इसलिए कि धन है तो सब कुछ है। पद, प्रतिष्ठा, शानोशौकत। सुरक्षा, मन की शांति। जो चाहो, कर सकते हो। छुट्टियां मनाने कभी केरल पहुंच गए तो कभी स्विटजरलैंड। बच्चों को मन चाहा तो ऑक्सफोर्ड से पढ़ाया, नहीं तो हार्वर्ड से। धन की <a href='http://www.arthkaam.com/money-does-not-mean-wealth/16383/'>[...]</a>]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<br/><p>जहां भी देखो, हर तरफ, हर कोई नोट बनाने में लगा है। इसलिए कि धन है तो सब कुछ है। पद, प्रतिष्ठा, शानोशौकत। सुरक्षा, मन की शांति। जो चाहो, कर सकते हो। छुट्टियां मनाने कभी केरल पहुंच गए तो कभी स्विटजरलैंड। बच्चों को मन चाहा तो ऑक्सफोर्ड से पढ़ाया, नहीं तो हार्वर्ड से। धन की महिमा आज से नहीं, सदियों से है। करीब 2070 साल पहले 57-58 ईसा-पूर्व में हमारे भर्तहरि नीतिशतक तक में कहा गया था, “जिसके पास धन है वही पुरुष कुलीन है, वही पंडित है, वही विद्वान है और सुनने योग्य व गुणज्ञ है। वही वक्ता है और वही दर्शनीय है। तात्पर्य यह है कि सभी गुण स्वर्ण रूपी धन पर आश्रित हैं।”</p>
<p>अफसोस! सदियो बीत जाने के बाद भी हमारे गांवों में यही स्थिति बरकरार है। नोट से पद-प्रतिष्ठा व सम्मान ही नहीं, वोट तक खरीदे जाते हैं। चोरी-डकैती या किसी भी गलत आचरण व भ्रष्टाचार से धन आए, लोग ऐसे धनवान को सिर आंखों पर बैठाते हैं। उसके साथ उठने-बैठने का मौका मिल जाए तो अपने को धन्य समझते हैं। उसे शादी-ब्याह जैसे समारोहों में खास निमंत्रण भेजा जाता है। लेकिन शहरों में, खासकर शहरी मध्य वर्ग में यह हालत नहीं है। वह इस मानसिकता से मुक्त हो रहा है। मधु कोड़ा या ए राजा ने भले ही करोड़ों नहीं, अरबों कमा लिए हों, लेकिन लोग उन्हें हिकारत की निगाह से देखते हैं। वह दिन दूर नहीं, जब ऐसे लोगों के घर सीबीआई ही नहीं, आम पब्लिक तक के छापे पड़ने लग जाएं।</p>
<p>लेकिन उनको फिक्र करने की जरूरत नहीं जो ईमानदारी से धन कमाते और सही निवेश से उसको बढ़ाते हैं। हालांकि ईमानदारी और बेईमानी की कोई शाश्वत परिभाषा नहीं है। यह भी युग और काल सापेक्ष है। हर युग में सही तरीके से धन कमाने के सुपरिभाषित रास्ते होते हैं। जो इनको तोड़ता है, वह बेईमान और जो मानता है, वह ईमानदार। लेकिन कल को अगर सिगरेट व तंबाकू को ड्रग्स की श्रेणी में रख दिया गया तो आईटीसी जैसी कंपनियों की बड़ी कमाई भ्रष्टाचार की श्रेणी में आ जाएगी।</p>
<p>हमें एक मूल बात ध्यान में रखनी चाहिए कि धन का मतलब दौलत नहीं होता। धन तो दौलत की माप और लेनदेन का साधन भर है। यह धन नोटों की शक्ल में कहीं रुपए में दिखता है तो कहीं डॉलर, येन, पौंड या यूरो में। इस धरती पर असली दौलत है प्रकृति। ये जमीन, जंगल, नदियां, जीव-जंतु पेड़-पौधे और लोग। धन तो इन तक पहुंचने, इनसे रिश्ते जोड़ने का साधन भर है। लेकिन समय के साथ यह साधन से साध्य बन गया। हम छाया की माया में पड़ गए। हम यह नहीं देख पाते कि धन तो हमारे बुने हुए सामाजिक जाल का ही एक तरह का अमूर्तन है। तंत्र को बनाए बगैर हम उनके प्रतिफल नोट को सीधे लपक लेना चाहते हैं। नहीं समझते कि रिश्ते खत्म तो नोट खत्म।</p>
<p>साथ ही हमें यह भी समझना होगा कि लगातार मुनाफा बढ़ाने की जुगत में लगे बैंकर व सीईओ भी दौलत नहीं पैदा करते। वे ज्यादा से ज्यादा उन मधुमक्खियों की तरह हैं जो फूलों से शहद को उठाकर अपने छत्ते में जमा करती हैं। असली दौलत का सृजन तो वैज्ञानिक करता है, डॉक्टर करता है, इंजीनियर करता है, कलाकार करता है। वो सॉफ्टवेयर प्रोफेनशल करता है जो अनसुलझी समस्याओं को सुलझाने के नए सूत्र पेश कर देता है। वह उपन्यासकार करता है जो हमारी बंद दीवारों में नई-नई खिड़कियां खोलता चला जाता है। असली दौलत तो वे माताएं पैदा करती हैं जो अपने बच्चों में संस्कार और नए जमाने से लड़ने का हुनर भरती हैं। अध्यापक से लेकर कामगार और किसान तक हर वो शख्स दौलत पैदा करता है जो कुछ न कुछ नया सृजन करता है। बाकी तो सब इस कोठी का धान उस कोठी में करने, ताश के पत्तों को फेटते जाने का खेल है।</p>
<p>काश! किसी दिन ऐसा हो जाए कि जो सृजन करे, वही धनवान बने। ऐसा हो जाए तो हर तरफ समृद्धि के साथ ही सुख व शांति भी आ जाएगी। लोग ऐन-केन प्रकरेण नोटों को खींचने में नहीं, बल्कि नया कुछ सृजन करने को प्रेरित होंगे। लेकिन जब तक ऐसा नहीं होता, तब तक तो धन को दौलत बनाने के वाजिब साधनों का ही सहारा लेना होता। शेयर बाजार ऐसा ही एक साधन है। आइए देखते हैं दो फुटकर बातें जो इस हफ्ते चर्चा के दौरान सामने आईं&#8230;</p>
<ul>
<li>बचत को लगाने का सबसे जोखिम भरा ठिकाना है शेयर बाजार तो वहां से सबसे ज्यादा रिटर्न भी मिलने की संभावना होती है। लेकिन धन डूबकर रसातल में भी जा सकता है। इसलिए कोई भी अपनी सारी बचत शेयर बाजार में नहीं लगाता। दो-तीन महीने की जरूरत भर का कैश अलग रखकर बाकी धन बैंक एफडी से लेकर सोना व प्रॉपर्टी जैसे अपेक्षाकृत सुरक्षित माध्यमों में भी लगाता है। लेकिन निवेश का एक और विकल्प है जिस पर आम निवेशकों का उतना ध्यान नहीं गया है। यह माध्यम है बांड। बांडों में भी सबसे सुरक्षित हैं सरकारी बांड। लेकिन इनमें उतना ब्याज नहीं मिलता तो उनकी तरफ पहले से धनवान लोग ही ज्यादा खिंचते हैं। बांडों में आम निवेशकों के लिए एक खास बांड हैं इंफ्रास्ट्रक्चर बांड।</li>
</ul>
<ul>
<li>नहीं समझ में आता कि शेयर बाजार में यह किसके करमों की गति और कौन-सी होनी है जो सब कुछ अच्छा होते हुए भी किसी कंपनी के शेयर के साथ बुरा हो जाता है। सही संदर्भ के लिए पहले संत कबीर का पूरा पद, “करम टारे नाहिं टरी। मुनि वसिष्ठ से पण्डित ज्ञानी साधि के लगन धरी। सीता हरन मरन दसरथ को, वन में बिपत परी। कहं वह फन्द कहां वह पारिधि, कहं वह मिरग चरी। कोटि गाय नित पुन्य करत नृग गिरगिट जोनि परी। पाण्डव जिनके आप सारथी, तिन पर बिपति परी। कहत कबीर सुनो भई साधो होने होके रही।” क्या सचमुच अपने शेयर बाजार में सब कुछ इतना फिक्स है कि सारी गणनाएं यहां आकर फेल हो जाती हैं?</li>
</ul>
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		<title>समय सापेक्ष</title>
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		<pubDate>Sat, 04 Feb 2012 00:45:33 +0000</pubDate>
		<dc:creator>अनिल रघुराज</dc:creator>
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			<content:encoded><![CDATA[<br/><p>समय के साथ चलो तो चीजें बड़ी स्थिर या धीमी दिखती हैं। कहीं कोई खटका नहीं। सब कुछ सामान्य गति से चलता है। लेकिन समय से पीछे छूट जाओ तो सब कुछ तेज़ी से भागता हुआ नज़र आता है।</p>
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		<title>ट्राई ने 2जी स्‍पेक्‍ट्रम की नीलामी पर सुझाव मांगे</title>
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		<pubDate>Fri, 03 Feb 2012 17:37:19 +0000</pubDate>
		<dc:creator>अनिल रघुराज</dc:creator>
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		<description><![CDATA[<br/>सुप्रीम कोर्ट का आदेश आते ही टेलिकॉम नियामक संस्था, भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) सक्रिय हो गई है। उसने शुक्रवार को देश के 22 सर्किलों में 2जी बैंड स्पेक्ट्रम की नीलामी के बारे में सभी संबंधित पक्षों की राय जानने के लिए में एक पूर्व-परामर्श पत्र जारी कर दिया। 3जी स्पेक्ट्रम की नीलामी से पहले <a href='http://www.arthkaam.com/trai-issues-pre-consultation-paper/16377/'>[...]</a>]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<br/><p>सुप्रीम कोर्ट का आदेश आते ही टेलिकॉम नियामक संस्था, भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) सक्रिय हो गई है। उसने शुक्रवार को देश के 22 सर्किलों में 2जी बैंड स्पेक्ट्रम की नीलामी के बारे में सभी संबंधित पक्षों की राय जानने के लिए में एक पूर्व-परामर्श पत्र जारी कर दिया। 3जी स्पेक्ट्रम की नीलामी से पहले भी ऐसा किया गया था।</p>
<p>बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने याचिका संख्‍या 423/2010 और 10/2010 पर 2 फरवरी 2012 को सुनाए गए आदेश में ट्राई को निर्देश दिया है कि वह नीलामी द्वारा 22 सर्विस क्षेत्रों में 2-जी बैंड स्‍पेक्‍ट्रम के लाइसेंस और आवंटन के लिए ताजा सुझाव प्राप्‍त करें। कोर्ट जनवरी 2008 में पहले आओ, पहले पाओ की नीति के तहत जारी सारे 122 लाइसेंस रद्द कर दिए हैं।</p>
<p>इस मुद्दे पर ट्राई ने सभी पक्षों से से उनके सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। वे अपने लिखित सुझाव 15 फरवरी 2012 तक भेज सकते हैं। ट्राई ने कहा कि इसकी समय सीमा नहीं बढ़ाई जाएगी।</p>
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		<title>सार्वजनिक जीवन में शुचिता लाने में लंबा वक्त</title>
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		<pubDate>Fri, 03 Feb 2012 17:17:22 +0000</pubDate>
		<dc:creator>अनिल रघुराज</dc:creator>
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		<description><![CDATA[<br/>अपनी ईमानदारी के लिए मशहूर, लेकिन हर तरफ से भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी सरकार के मुखिया, हमारे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने स्वीकार किया है कि भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए उनकी सरकार ने पिछले साल कई कानूनी व प्रशासनिक कदम उठाए। फिर भी सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता, जवाबदेही व शुचिता लाने में अभी <a href='http://www.arthkaam.com/integrity-in-public-life-will-take-time/16373/'>[...]</a>]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<br/><p>अपनी ईमानदारी के लिए मशहूर, लेकिन हर तरफ से भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी सरकार के मुखिया, हमारे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने स्वीकार किया है कि भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए उनकी सरकार ने पिछले साल कई कानूनी व प्रशासनिक कदम उठाए। फिर भी सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता, जवाबदेही व शुचिता लाने में अभी लंबा वक्त लग सकता है।</p>
<p>राज्यों के मुख्य सचिवों की बैठक को सम्बोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि बेहतर प्रशासन सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार और राज्य सरकारों को मिलकर काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सरकार सार्वजनिक जीवन में भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने और लोगों को बेहतर सेवा प्रदान के लिए सभी वैधानिक व प्रशासनिक उपाय करने को प्रतिबद्ध है।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा, “इन क्षेत्रों में पिछले एक साल में हम निरंतर आगे बढ़े। हमने संसद में सिटिजन चार्टर विधेयक पेश किया।” मनमोहन सिंह ने संसद के पिछले सत्र में लोकपाल एवं लोकायुक्त विधेयक पारित नहीं किए जा सकने पर अफसोस जताया। लेकिन उम्मीद जताई कि सरकार जल्द ही प्रभावी लोकपाल बनाने में कामयाब होगी। उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी खरीद को नियमित करने के लिए हम कानून बनाने जा रहे हैं। सेवाओं की बेहतर आपूर्ति के लिए राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस योजना क्रियान्वित की जा रही है।</p>
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		<title>राज्यों को दस करोड़ नौकरियां बनाने की नसीहत दे डाली मनमोहन सिंह ने</title>
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		<pubDate>Fri, 03 Feb 2012 16:55:16 +0000</pubDate>
		<dc:creator>अनिल रघुराज</dc:creator>
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		<description><![CDATA[<br/>आर्थिक ठहराव की शिकार अर्थव्यवस्था ने यूपीए सरकार के मुखिया प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को राज्यों के सामने याचक या नसीहत देने की मुद्रा में खड़ा कर दिया है। उन्होंने शुक्रवार को राजधानी दिल्ली में राज्यों के मुख्य सचिवों से कहा कि वे इस बात पर सावधानी से विचार करें कि किस तरह राज्य राष्ट्रीय मैन्यूफैक्चरिंग <a href='http://www.arthkaam.com/pm-apeals-for-employment-generation/16366/'>[...]</a>]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<br/><p>आर्थिक ठहराव की शिकार अर्थव्यवस्था ने यूपीए सरकार के मुखिया प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को राज्यों के सामने याचक या नसीहत देने की मुद्रा में खड़ा कर दिया है। उन्होंने शुक्रवार को राजधानी दिल्ली में राज्यों के मुख्य सचिवों से कहा कि वे इस बात पर सावधानी से विचार करें कि किस तरह राज्य राष्ट्रीय मैन्यूफैक्चरिंग नीति का अधिकतम लाभ उठा सकते हैं। एक दशक में देश के सकल घरेलू उत्पादन में मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र के योगदान को 25 फीसदी तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे रोज़गार के 10 करोड़ नए अवसर पैदा होंगे।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने राज्यों के मुख्य सचिवों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह बात कही। लेकिन शायद वे एक बात भूल गए कि आर्थिक विकास नौकरशाही का नहीं, राजनीतिक नेतृत्व का मसला है और अगर मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र का योगदान बढ़ाना है तो इसके लिए उन्हें राज्यों के सत्तारूढ़ राजनीतिक दलों को तैयार करना पड़ेगा। प्रधानमंत्री ने स्वीकार किया कि वैश्विक स्तर पर खराब स्थिति और देश में ऊंची ब्याज दरों के चलते चालू वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि दर घटकर 7 से 7.5 फीसदी पर आ जाने की उम्मीद है। पिछले वर्ष आर्थिक वृद्धि 8.4 फीसदी रही थी।</p>
<p>बीते वित्त वर्ष की 8.4 प्रतिशत की वृद्धि दर के बारे में डॉ. सिंह ने कहा कि संकटग्रस्त दुनिया को देखते हुए यह शानदार प्रदर्शन था। उन्होंने कहा, “कठिन आर्थिक माहौल, विशेषकर यूरो क्षेत्र के बढ़ते संकट के साथ साथ मौद्रिक नीति को सख्त किए जाने के कारण वृद्धि दर प्रभावित हुई है।” महंगाई के मोर्चे पर राहत मिलती दिख रही है। लेकिन खाद्य वस्तुओं की महंगाई पर अंकुश के लिए कृषि उत्पादन और उत्पादकता में निरंतर बढ़ोतरी जरूरी है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि यहीं पर राज्य सरकारों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। प्रधानमंत्री ने राज्यों का आह्वान किया कि वे कृषि अनुसंधान में आधुनिक प्रौद्योगिकी पर ध्यान केंद्रित करें। इस क्षेत्र में सरकारी निवेश बढ़ाया जाए और कृषि विपणन प्रणाली में सुधार लाया जाना चाहिए।</p>
<p>प्रधानमंत्री यहीं पर मल्टी ब्रांड रिटेल को विदेशी कंपनियों के लिए खोलने के स्थगित एजेंडे पर भी काम करते नजर आए। उन्होंने कहा कि एपीएमसी (कृषि उपज विपणन कानून) की समीक्षा और उसमें संशोधन की जरूरत है। इससे किसान अपनी उपज को रिटेल दुकानों पर लाएंगे और रिटेलरों को सीधे किसानों से खरीद की सुविधा मिलेगी। इससे किसानों को बेहतर मूल्य मिल सकेगा, बरबादी कम होगी और खुदरा बाजार में कीमतों में प्रतिस्पर्धा आएगी।</p>
<p>सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के कंप्यूटरीकरण पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि खाद्य सुरक्षा विधेयक वास्तविकता बन सकता है। इसके लिए पीडीएस को सुधारना होगा और इसमें तेज तथा प्रभावी तरीके से सुधार करना होगा। श्री सिंह ने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में कमी एक अन्य चिंता की वजह है। यह देश के विकास को आगे बढ़ाने की राह में एक बड़ी बाधा है। प्रधानमंत्री ने राज्यों से सड़कों, राजमार्गों और सिंचाई सुविधाओं पर ज्यादा जोर देने को कहा। उन्होंने मुख्य सचिवों का ध्यान कौशल विकास के महत्व की ओर भी दिलाया। प्रधानमंत्री ने कहा कि 2018 तक देश को 26 करोड़ कुशल कामगारों की जरूरत होगी।</p>
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		<title>गिरावट का इंतज़ार, बढ़ता बाज़ार</title>
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		<pubDate>Fri, 03 Feb 2012 16:23:37 +0000</pubDate>
		<dc:creator>चमत्कार चक्री</dc:creator>
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		<description><![CDATA[<br/>बाजार हमेशा चौंकाता रहता है। उसका यही स्वभाव है। हर कोई इस समय करेक्शन चाहता है। लेकिन ऐसा हो नहीं रहा। बाजार बढ़ता ही जा रहा है। करीब दो बजे तक मामला थोड़ा-बहुत ऊपर-नीचे चलता रहा। फिर उसके बाजार ने क्या छलांग लगाई। निफ्टी 5334.85 तक पहुंचने के बाद अंत में 1.06 फीसदी की बढ़त <a href='http://www.arthkaam.com/market-not-ready-to-correct/16364/'>[...]</a>]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<br/><p>बाजार हमेशा चौंकाता रहता है। उसका यही स्वभाव है। हर कोई इस समय करेक्शन चाहता है। लेकिन ऐसा हो नहीं रहा। बाजार बढ़ता ही जा रहा है। करीब दो बजे तक मामला थोड़ा-बहुत ऊपर-नीचे चलता रहा। फिर उसके बाजार ने क्या छलांग लगाई। निफ्टी 5334.85 तक पहुंचने के बाद अंत में 1.06 फीसदी की बढ़त लेकर 5325.85 पर बंद हुआ। अब तो यही लगता है कि जब आप सोचते-सोचते थक जाएंगे, तब अचानक धूमधड़ाम करेक्शन हो जाएगा। टेक्निकल स्तर पर कहें तो अमेरिकी बाजार के सूचकांक डाउ जोंस में भी करेक्शन की बेला आ चुकी है।</p>
<p>अपने बाजार के बारे में मेरी साफ राय है कि यहां से और बढ़ने की गुंजाइश सीमित है। इसलिए लांग बने रहने का बहुत कोई मतलब नहीं है। अभी तो बिकवाली शुरू होने दीजिए और बाजार को तर्कसंगत स्तर पर आने दीजिए। तब हम मजबूती से फिर से एंट्री मारेंगे।</p>
<p>पी चिदंबरम का मसला बाजार के लिए बड़ा झटका हो सकता है। अगर कल, शनिवार को उनके खिलाफ कोई फैसला आता है तो बाजार ध्वस्त हो सकता है। अगर ऐसा नहीं होता, तब भी बाजार पहले बढ़ने के बाद फिर धड़ाम हो जाएगा। इसलिए जोखिम काहे को उठाया जाए!</p>
<p>मेरा कहना मानें तो अब लांग सौदों को काट डालें। कल परसों दो दिन सप्ताहांत की छुट्टियों का लुत्फ उठाएं। हम सोमवार को नई रणनीति का फैसला करेंगे।</p>
<p><span style="color: #003366;"><strong>दीनहीन, धैर्यवान, चालाक, सौम्य या सम्मानजनक होना, यह सारे गुण-दुर्गुण एक तरफ हैं। बहादुर इंसान के लिए पौरुषेय या स्त्रीवत होना भी कोई मायने नहीं रखता। उसका तो एक ही गुण है कि वह सहृदय होता है, दयालु व कृपालु होता है।</strong></span></p>
<p><em>(चमत्कार चक्री एक अनाम शख्सियत है। वह बाजार की रग-रग से वाकिफ है। लेकिन फालतू के कानूनी लफड़ों में नहीं पड़ना चाहता। इसलिए अनाम है। वह अंदर की बातें आपके सामने रखता है। लेकिन उसमें बड़बोलापन हो सकता है। आपके निवेश फैसलों के लिए अर्थकाम किसी भी हाल में जिम्मेदार नहीं होगा। यह मूलत: </em><a href="http://www.cniglobalbiz.com/Home/Home.aspx"><em>सीएनआई रिसर्च</em></a><em> का कॉलम है, जिसे हम यहां आपकी शिक्षा के लिए पेश कर रहे हैं)</em></p>
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