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म्यूचुअल फंडों में अब सीधे निवेश करेंगे विदेशी

Feb 282011
 

चालू खाते के बढ़ते घाटे से परेशान सरकार देश में विदेशी पूंजी को खींचने की हरचंद कोशिश कर रही है। इसी के तहत 2011-12 के बजट में जहां कॉरपोरेट बांडों को विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की निवेश सीमा बढ़ाकर 40 अरब डॉलर कर दी गई है, वहीं म्यूचुअल फंडों को अपनी इक्विटी स्कीमों में सीधे विदेशी निवेशकों से अभिदान या सब्सक्रिप्शन लेने की इजाजत दे दी गई है। वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने यह घोषणा करते हुए कहा कि इससे भारतीय म्यूचुअल फंड सीधे विदेशी निवेशकों तक पहुंच सकेंगे और भारतीय इक्विटी बाजार में विदेशी निवेशकों के नए वर्ग को शामिल किया जाएगा।

बात दें कि इस समय विदेशी निवेशकों के रूप में पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी के पास पंजीकृत एफआईआई व उनके सब-एकाउंट और अनिवासी भारतीय (एनआरआई) ही म्यूचुअल फंड स्कीमों में निवेश कर सकते हैं। लेकिन दिक्कत यह है कि एफआईआई म्यूचुअल फंडों की इक्विटी स्कीमों में दिलचस्पी नहीं लेते और सीधे शेयर बाजार में निवेश करते हैं। सीएनआई रिसर्च के सीएमडी किशोर ओस्तवाल मानते हैं कि सरकार ने इस प्रस्ताव से भारतीय पूंजी बाजार में एफआईआई के प्रभुत्व को तोड़ने की परोक्ष कोशिश की है। उनका कहना है कि अब एफआईआई के साथ ही विदेशी क्यूआईआई (क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर) और एफडीआई की रकम भी म्यूचुअल फंड में आ सकती है।

हालांकि उद्योग के लोगों के अनुसार इसमें एक बाधा आएगी केवाईसी (नो योर कस्टमर) मानकों की पूर्ति को लेकर क्योंकि विदेशी निवेशकों की पहचान को सुनिश्चित करना टेढी खीर होगा। लेकिन विदेशी निवेशक आने लगे तो हमारे म्यूचुअल फंड उद्योग की सूरत और सीरत बदल सकती है क्योंकि विदेशी निवेशक खासकर छोटे फंड और हाई नेटवर्थ वाले विदेशी निवेश का क्षितिज बड़ा रखते हैं। वे आम भारतीय निवेशकों की तरह कतई नहीं है कि जरा सा झटका लगते ही अपना निकालकर किनारे हो जाएं।

लेकिन अनिल अंबानी समूह से जुड़े मधु केला कहते हैं कि विदेशी निवेशक अपनी रकम लगाते वक्त रुपए की विनिमय दर की भी गणना करेंगे। इसलिए भारतीय मुद्रा में स्थिरता इस मकसद की पूर्ति के लिए जरूरी शर्त है। फिर भी दबाव से गुजर रहे हमारे म्यूचुअल फड के लिए यह एक उत्साहवर्धक खबर हैं। बता दें कि बीते साल इक्विटी म्यूचुअल फंड स्कीमों की आस्तियों (एयूएम) में 6 फीसदी की कमी आई है क्योंकि निवेशकों ने अपनी 16,000 करोड़ रुपए से ज्यादा रकम इनमें से निकाल ली।

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