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जल बिच मीन पियासी

Sep 032010
 

जहां गोदामों में लाखों टन अनाज होने के बावजूद करोड़ों लोग भूखे सोते हों, जहां प्रतिभाओं की खान के बावजूद काम के काबिल लोग नहीं मिलते, उस व्यवस्था को हम सच्चा लोकतंत्र कैसे कह सकते हैं।

  One Response to “जल बिच मीन पियासी”

Comments (1)
  1. चिन्तनीय है।

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