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ज्योति स्ट्रक्चर्स दहाई से इकाई तक!

Jul 212011
 

बहुत मुमकिन है कि आपने गांवों में कुंओं पर चलनेवाली रहट नहीं देखी होगी। मेरे देश की धरती सोना उगले, उगले हीरे-मोती जैसे पुराने गानों में देख सकते हैं। एक चक्र में चलती है रहट। खाली कूप नीचे जाता है और पानी भरकर ऊपर आ जाता है। नीचे जाकर मूल्यवान बनने का ऐसा ही चक्र हमारे शेयर बाजार में भी चलता है। हां, यहां रहट एक जगह टिकी नहीं रहती, बल्कि वह भी कंपनी का मूल्य बढ़ने के साथ-साथ ऊपर उठती रहती है। ठीक साल भर पहले 20 जुलाई 2010 को ज्योति स्ट्रक्चर्स का शेयर 52 हफ्ते के शिखर 169.10 रुपए पर था। महीने भर पहले 20 जून 2011 को नीचे में 80 रुपए पर था और 24 मई 2011 को 73.60 रुपए के निचले तल पर था।

कल 20 जुलाई 2011 को ऊपर में 91 रुपए तक जाने के बाद बीएसई (कोड – 513250) और एनएसई (कोड – JYOTISTRUC) दोनों में ही 90 रुपए पर बंद हुआ है। आखिर साल भर में इस तरह 46.78 फीसदी गिरने और महीने भर में 12.5 फीसदी बढ़ जाने की क्या वजह है? क्या यह एक महज बंधा-बंधाया चक्र है या कंपनी के कामकाज से भी इसका कोई लेना-देना है? आइए देखते हैं।

ज्योति स्ट्रक्चर्स 1974 में बनी कंपनी है। बिजली के ट्रांसमिशन लाइन टावर और सब स्टेशन बनाती भी है और लगाती भी। दूसरों के लिए शुरुआत से लेकर एकदम चालू करने तक परियोजनाओं का काम भी करती है। ट्रांसमिशन लाइन टावर की निर्माण इकाइयां उसने नासिक, रायपुर और दुबई में लगा रखी हैं। उसे बिजली की परियोजनाओं की डिजाइन टेस्टिंग, मैन्यूफैक्चरिंग, सप्लाई व कंस्ट्रक्शन में महारत हासिल है। उसके पास इन-हाउस टेस्टिंग सुविधाएं भी हैं। देश ही नहीं, विदेश तक में अपने उत्पाद व सेवाएं बेचती है। दुनिया के करीब 40 देशों में उसके ग्राहक हैं। दुबई में संयुक्त उद्यम है। जोहानेसबर्ग (दक्षिण अफ्रीका) और अमेरिका में सब्सिडियरी इकाइयां हैं। उसका टेक्सास का संयंत्र इसी साल नवंबर तक चालू हो जाएगा।

मार्च 2011 में बीते वित्त वर्ष 2010-11 में कंपनी ने 2379.8 करोड़ रुपए की आय पर 110.91 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ कमाया है। उसकी आय साल भर पहले के 2016.2 करोड़ रुपए से 18.03 फीसदी और शुद्ध लाभ साल भर पहले के 91.92 करोड़ रुपए से 20.66 फीसदी ज्यादा है। उसका सालाना ईपीएस (प्रति शेयर मुनाफा) अभी 13.52 रुपए है। इस तरह उसका शेयर इस समय 6.65 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा है। आप सोच भी नहीं सकते कि साढ़े तीन साल पहले यह शेयर जनवरी 2008 में 54.14 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हुआ था। जनवरी 2010 तक में इसका पी/ई अनुपात 20.44 रहा है। जनवरी 2011 में भी यह अनुपात 12.92 तक गया था। लेकिन अगले महीने फरवरी से इसका पी/ई अनुपात दहाई को छोड़ इकाई में आ गया।

इसकी कोई प्रत्यक्ष वजह नहीं समझ में आती। एक वजह यह हो सकती है कि चूंकि बिजली व इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र के स्टॉक्स को बाजार अभी सही तवज्जो नहीं दे रहा है, इसलिए इसके भी शेयर पिटे पड़े हैं। लेकिन इसी की समकक्ष कंपनियों में केईसी इंटरनेशनल का शेयर 10.6 और सुजाना टावर्स का शेयर 21.9 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा है। इसलिए कायदन 10 का भी पी/ई पकड़े तो ज्योति स्ट्रक्चर्स को 135 रुपए तक चला ही जाना चाहिए। यानी, इसमें 50 फीसदी रिटर्न की गुंजाइश दिख रही है।

इस आकलन में अतीत की मजबूती ही नहीं, भविष्य की संभावनाएं भी शामिल हैं। मार्च 2011 तक ही कंपनी के पास 4500 करोड़ रुपए के नए ऑर्डर हाथ में थे जो उसकी सालाना आय से लगभग दोगुनी मात्रा के हैं। दूसरे, प्रबंधन के अनुसार उसके पास लगभग इतने ही ऑर्डरों के लिए टेंडर भरने का काम हो गया है। ऐसा भी नहीं कि कंपनी पर ऋण का भारी बोझ है। उसका ऋण/इक्विटी अनुपात एक से कम 0.79 पर है। पिछले तीन सालों में कंपनी की बिक्री 20.40 फीसदी और शुद्ध लाभ 12.58 की चक्रवृद्धि दर से बढ़ा है। कंपनी का इक्विटी पर रिटर्न 18.71 फीसदी के सम्मानजनक स्तर है। इसलिए ज्योति स्ट्रक्चर्स में दूरगामी निवेश बनता है। बी ग्रुप में शामिल इसके शेयरों में ट्रेडिंग भी ठीकठाक होती है।

कंपनी की इक्विटी 16.42 करोड़ रुपए है जो दो रुपए अंकित मूल्य के शेयरों में विभाजित है। इसका 72.40 फीसदी हिस्सा पब्लिक के पास है और बाकी 27.60 फीसदी ही प्रवर्तकों के पास है। शुरुआत में टाटा एक्सपोर्ट्स ने भी कंपनी में निवेश कर रखा था। इस समय पब्लिक के हिस्से में से डीआईआई के पास 27.48 फीसदी और एफआईआई के पास उसके 10.41 फीसदी शेयर हैं। उसके कुल शेयरधारकों की संख्या 41,104 है। इसमें से प्रवर्तकों के भिन्न 19 बड़े शेयरधारकों के पास उसके 38.90 फीसदी शेयर हैं।

इनमें से 18 तो निवेशक संस्थाएं हैं। एक व्यक्तिगत निवेशक हैं मोहन दौलतराम असनानी जिनके पास अपनी पत्नी समेत कंपनी के कुल 3.73 फीसदी शेयर हैं। प्रवर्तकों ने अपने हिस्से के शेयरों का 65.36 फीसदी (कंपनी की कुल इक्विटी का 18.04 फीसदी) गिरवी रखा हुआ है। कंपनी के चेयरमैन प्रोफेसर सदाशिव क्षीरसागर और प्रबंध निदेशक संतोष नायक हैं। हां, कंपनी बराबर हर साल लाभांश देती रही है। इस साल 2011 में उसने दो रुपए के शेयर पर 1.10 रुपए यानी 55 फीसदी का लाभांश दिया है।

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