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सुरक्षा की सीमा

Sep 012010
 

हम सभी बचपन से लेकर बड़े होने तक सुरक्षा के आदी हो जाते हैं। बचपन में मां-बाप की सुरक्षा, बड़े होने पर नौकरी की सुरक्षा। लेकिन बहुत सारी अनुभूतियां सुरक्षा का दायरा तोड़े बिना नहीं मिलतीं और हम अधूरे रह जाते हैं।

  One Response to “सुरक्षा की सीमा”

Comments (1)
  1. घर में रहने से बाहर के सुख नहीं मिलते।

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