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कम हुईं व्यक्तिगत बीमा पॉलिसियां

Jan 282011
 

लोगों में व्यक्तिगत जीवन बीमा पॉलिसियां लेने के बजाय सामूहिक बीमा पॉलिसियां लेने का रुझान बढ़ रहा है। यह सच झलकता है बीमा नियामक संस्था, आईआरडीए (इरडा) द्वारा शुक्रवार को जारी किए गए ताजा आंकड़ों से। दिसंबर 2010 तक सभी 23 जीवन बीमा कंपनियों के कारोबार संबंधी आंकड़ों से पता चलता है कि दिसंबर 2009 से दिसंबर 2010 के बीच जहां सामूहिक बीमा स्कीमों में कवर किए गए लोगों की संख्या 27.93 फीसदी बढ़ गई है, वहीं व्यक्तिगत पॉलिसियों की संख्या में 9.34 फीसदी की कमी आ गई है।

इरडा के अद्यतन आंकड़ों के अनुसार दिसंबर 2009 तक सामूहिक जीवन बीमा स्कीमों में कवर किए गए लोगों की कुल संख्या 5,30,84,440 थी। इसमें से 2,75,72,424 लोग एकल प्रीमियम और 2,55,12,026 गैर-एकल प्रीमियम वाली सामूहिक स्कीमों में कवर्ड थे। दिसंबर 2010 तक एकल प्रीमियम वाली सामूहिक स्कीमों में कवर्ड लोगों की संख्या 3,20,26,744 और गैर-एकल प्रीमियम वाली सामूहिक स्कीमों में कवर्ड लोगों की संख्या 3,58,85,002 हो गई। इस तरह एकल व गैर-एकल दोनों ही प्रीमियम वाली सामूहिक स्कीमों में कवर किए गए लोगों की संख्या में अच्छा-खासा इजाफा हुआ है।

इस दौरान सामूहिक बीमा पॉलिसियों की संख्या 6.62 फीसदी बढ़कर 18,926 से 20,178 पर पहुंच गई है। लेकिन दूसरी तरफ व्यक्तिगत बीमा पॉलिसियों की संख्या में 9.34 फीसदी की कमी आई है। दिसंबर 2009 में एकल व गैर-एकल प्रीमियम वाली व्यक्तिगत जीवन बीमा पॉलिसियों की संख्या 3,38,25,436 थी। दिसंबर 2010 तक यह संख्या घटकर 3,06,65,651 हो गई। इसमें से एकल प्रीमियम वाली पॉलिसियां 46,54,249 से 9.25 फीसदी घटकर 42,23,843 पर आ गई हैं, वहीं गैर-एकल प्रीमियम वाली व्यक्तिगत बीमा पॉलिसियों की संख्या में 9.36 फीसदी की कमी आई है और ये बारह महीनों के भीतर 2,91,71,187 से घटकर 2,64,41,808 पर आ गई है।

बीमा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि व्यक्तिगत बीमा पॉलिसियों की संख्या का घटना चिंता की बात है क्योंकि देश में अब भी जीवन बीमा की पहुंच आबादी के बड़े हिस्से तक नहीं है। बीमा के प्रति लोगों में जागरूकता नहीं है। ऐसे में इनका घटना यही दिखाता है कि इरडा और बीमा उद्योग आम लोगों में जीवन बीमा के प्रति जागरूकता नहीं पैदा कर रहा है। सामूहिक बीमा स्कीमों में कवर लोगों की संख्या का बढ़ना दिखाता है कि संगठित क्षेत्र में जीवन बीमा का चलन बढ़ रहा है जो स्वाभाविक है क्योंकि औद्योगिक विकास के साथ कंपनियां अपने सभी कर्मचारियों को बीमा कवर देती हैं। लेकिन इसका कोई ताल्लुक व्यक्तिगत बीमा की जागरूकता बढ़ने से नहीं है।

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