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रिजर्व बैंक ने फिर से खोली शाम की खिड़की

Nov 092010
 

रिजर्व बैंक ने पिछले हफ्ते चलनिधि समायोजन सुविधा (एलएएफ) के तहत बैंकों को शाम को धन उपलब्ध कराने की खिड़की बंद कर दी थी। लेकिन इस हफ्ते के पहले दो दिनों में बैंकों ने जिस तरह एलएएफ के तहत भारी रकम उठाई, उसे देखते हुए रिजर्व बैंक ने यह विशेष सुविधा दोबारा शुरू करने का फैसला किया है। अब 16 दिसंबर तक बैंक हर कामकाजी दिन में शाम 4.15 बजे रिजर्व बैंक से रेपो दर पर सरकारी प्रतिभूतियों के एवज में अल्कालिक उधार ले सकते हैं।

रिजर्व बैंक ने तय किया है कि सभी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक उससे एलएएफ के तहत अपनी कुल जमाराशि (एनडीटीएल – नेट डिमांड एंड टाइम लायबिलिटी) के एक फीसदी हिस्से तक अतिरिक्त तरलता हासिल कर सकते हैं। हां, इसके लिए उन्हें सरकारी प्रतिभूतियां या बांड रिजर्व बैंक के पास जमा कराने होंगे। लेकिन अगर इससे उनके लिए तय 25 फीसदी वैधानिक तरलता अनुपात (एसएलआर या सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश का स्तर) में कोई कमी आती है तो उनसे दंडस्वरूप अतिरिक्त ब्याज नहीं लिया जाएगा।

असल में बैंकों ने सोमवार, 8 नवंबर को एलएएफ के तहत सुबह रिजर्व बैंक से रेपो दर (6.25 फीसदी सालाना) पर 1,18,440 करोड़ रुपए उठाए, जबकि रिवर्स रेपो दर (5.25 फीसदी सालाना) पर केवल 2100 करोड़ रुपए जमा कराए। शाम की एलएएफ सुविधा बंद हो चुकी थी तो वे रिजर्व बैंक ने नई रकम ले नहीं सकते थे। 9 नवंबर, मंगलवार की सुबह फिर बैंकों ने रिजर्व बैंक ने 1,11,595 करोड़ रुपए उधार लिये, जबकि जमा कराए केवल 1875 करोड़ रुपए। इस स्थिति से चौकन्ना होकर रिजर्व बैंक ने फौरन दूसरी एलएएफ सुविधा बहाल कर दी है।

रिजर्व बैंक ने इस बाबत जारी सूचना में कहा है कि पिछले हफ्ते घोषित मौद्रिक नीति की दूसरी त्रैमासिक समीक्षा में कहा गया था कि, “तरलता की कमी मुद्रास्फीति को रोकने की सोच का हिस्सा व नतीजा है। लेकिन तरलता में ज्यादा कमी वित्तीय बाजारों व बैंकिंग प्रणाली में कर्ज के विकास, दोनों के लिए व्यवधान पैदा कर सकती है। इसलिए तरलता की मुश्किलों से आर्थिक गतिविधि में खलल न पड़े, इसे सुनिश्चित करने के लिए तरलता की कमी को तर्कसंगत सीमा में रखने की जरूरत है।”

तरलता के दबाव को कम करने के लिए रिजर्व बैंक ने हाल में ओएमओ (ओपन मार्केट ऑपरेशंस) के जरिए बैंकों से सरकारी बांड खरीद कर उन्हें नकदी उपलब्ध कराई है। पिछले हफ्ते 12,000 करोड़ के सरकारी बांड खुले बाजार से खरीदने का लक्ष्य रखा गया था जिसमें से 8352 करोड़ रुपए के बांड खरीदे गए। लेकिन यह कदम पर्याप्त साबित नहीं हुआ। इसलिए शाम की दूसरी विशेष एलएएफ सुविधा तत्काल प्रभाव से शुरू कर दी गई है। हालांकि यह तात्कालिक उपाय है और फिलहाल यह 16 दिसंबर 2010 तक ही उपलब्ध रहेगा। एनडीटीएल का एक फीसदी, दूसरे शब्दों में एसएलआर में एक फीसदी की ढील से बैंक हर कामकाजी दिन रिजर्व बैंक से 50,000 करोड़ रुपए अतिरिक्त ले पाएंगे।

सूत्रों का कहना है कि इस समय केंद्र सरकार के पास 80,000 करोड़ रुपए का कैश बैलेस है। सरकार जैसे ही यह रकम खर्च करना शुरू कर देगी, तरलता की समस्या खत्म हो जाएगी। तब तक रिजर्व बैंक ने तरलता संकट को दूर करने का फौरी उपाय शाम को भी एलएएफ खिड़की खोलने के रूप में किया है।

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