खून की एक बूंद सारा भेद खोल देती है कि शरीर का कौन-सा अंग कैसा काम कर रहा है? लीवर में क्या समस्या है और किडनी का हाल क्या है? लेकिन व्यक्तियों से बने समाज में क्या व्यक्ति वो इकाई है जो समाज के बीमार अंगों का भेद खोल सके? (more…)
Jul 282012
खून की एक बूंद सारा भेद खोल देती है कि शरीर का कौन-सा अंग कैसा काम कर रहा है? लीवर में क्या समस्या है और किडनी का हाल क्या है? लेकिन व्यक्तियों से बने समाज में क्या व्यक्ति वो इकाई है जो समाज के बीमार अंगों का भेद खोल सके? (more…)
न तुम अंतिम हो, न वह और न ही मैं। हम सब बूंद हैं, कड़ियां हैं अनंत सागर की। यहां कुछ भी सपाट नहीं, सब गोल है। चलते-चलते आखिरकार हम वहीं पहुंच जाते हैं, जहां से यात्रा की शुरुआत की थी। (more…)
यहां से वहां तक समुद्र। लहरों के बीच में हम। गले तक पानी। धरती नजर ही नहीं आती। कितना घबराते हैं हम! लेकिन समुद्र की बूंदें तो लहरों के साथ कुलांचे मारती हैं। हम भी तो बूंद ही हैं जन समुद्र की। (more…)