अंतिम आदमी
2010-12-07
मानव समाज कोई गेहूं का बोरा नहीं है जो चार दाने उठाकर सारे माल की गुणवत्ता तय कर दी जाए। यहां तो अंतिम आदमी भी इतना अनोखा हो सकता है कि सारे सर्वेक्षण का नतीजा ही पलट जाए।और भीऔर भी
मानव समाज कोई गेहूं का बोरा नहीं है जो चार दाने उठाकर सारे माल की गुणवत्ता तय कर दी जाए। यहां तो अंतिम आदमी भी इतना अनोखा हो सकता है कि सारे सर्वेक्षण का नतीजा ही पलट जाए।और भीऔर भी
किसी के मान लेने से कोई गिनती नहीं बन जाता। हम में हर कोई अपने मन का राजा है। किसी से कम नहीं। शायद हर जानवर भी खुद को अनोखा समझता होगा। वैसे, हर गिनती भी तो अपने-आप में अनोखी होती है।और भीऔर भी
किसी अनोखे विचार पर गुमान पालना ठीक नहीं क्योंकि हम विचार को नहीं, विचार हमें चुनता है। आइंसटाइन का नाम गिलबर्ट भी हो सकता था और गैलीलियो का अब्राहम भी। इसलिए नाम नहीं, काम से वास्ता रखो दोस्त!और भीऔर भी
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