हम अपनी समस्याओं को लेकर इतने आक्रांत रहते हैं कि होश ही नहीं रहता कि दूसरे की समस्याएं क्या हैं। अरे बंधु! ध्यान रखें कि इस जहान में समस्याओं से मुक्त कोई नहीं। हां, सबकी समस्याओं की सघनता और स्तर जरूर अलग-अलग है।और भीऔर भी

वर्तमान से क्षुब्ध, अतीत से मुग्ध और भविष्य से आक्रांत लोग कभी ठीक से नहीं जी पाते। इसलिए नहीं कि वे अभावग्रस्त है, बल्कि इसलिए कि गलत सोच ने उनका मूल मानव तत्व सोख लिया होता है।और भीऔर भी

जब तक हम किसी चीज में डूबे हैं, तभी तक उससे आक्रांत हैं। बाहर निकलते ही लगता है कि इस कदर परेशान होना गलत था। लेकिन सृजन के लिए डूबना ही पड़ता है तो समझ के लिए निकलना भी पड़ता है।और भीऔर भी