हमारे राजनेताओं को मजबूरन अपनी जुबान खोलते वक्त जन-भावनाओं का ख्याल रखना पड़ता है। लेकिन अच्छे से अच्छे नौकरशाह भी अक्सर जन-भावनाओं के प्रति इतने असंवेदनशील हो जाते हैं कि ऐसी बातें बोल जाते हैं कि अपनी परंपरा का यह नीति-वाक्य तक याद नहीं रहता – सत्यम् ब्रूयात प्रियं ब्रूयात, न ब्रूयात सत्यम् अप्रियं। आपको याद होगा कि कुछ साल पहले अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने कहा था कि दुनिया में जिंसों के दामऔरऔर भी

भारतीय रेल की आमदनी का मुख्य हिस्सा मालभाड़े से आता है और अमूमन उसकी वृद्धि दर यात्री किराए से ज्यादा रहती है। लेकिन चालू वित्त वर्ष के पहले आठ महीनों में यात्री किराए से रेलवे की आमदनी जहां 9.41 फीसदी बढ़ी है, वहीं मालभाड़े से हुई आमदनी 5.83 फीसदी ही बढ़ी है। रेल मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2010-11 में अप्रैल से नवंबर तक के आठ महीनों में भारतीय रेल की कुल आमदनी में 7.18औरऔर भी