सरकार ने मंगलवार को सिंगल ब्रांड रिटेल में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की सीमा 51 फीसदी से बढ़ाकर 100 फीसदी करने की अधिसूचना जारी कर दी है। लेकिन जिन भी विदेशी दुकानों में 51 फीसदी से ज्यादा एफडीआई की जाएगी, उन्हें अपने बेचे जानेवाले माल के कुल मूल्य का कम से कम 30 फीसदी हिस्सा छोटे उद्योगों, ग्रामीण व कुटीर उद्योगों, दस्तकारों व शिल्पकारों से खरीदना होगा। वाणिज्‍य व उद्योग मंत्रालय के औद्योगिक नीति और संवर्द्धन विभागऔरऔर भी

मल्टी ब्रांड रिटेल को प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के लिए खोलने पर सचिवों की समिति की बैठक अगले हफ्ते शुक्रवार, 22 जुलाई को होने जा रही है। कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में होनेवाली इस बैठक में मुख्य रूप से वाणिज्य, उद्योग, वित्त, खाद्य व उपभोक्ता और कृषि मंत्रालय के सचिव भाग लेंगे। यह समिति अपनी सिफारिशें औद्योगिक नीति व संवधर्न विभाग (डीआईपीपी) को सौंप देगी। इसके बाद डीआईपीपी इस मसले पर कैबिनेट तैयार करके सरकार को सौंपेगा।औरऔर भी

एक तरफ भारतीय दवा कंपनियां कह रही हैं कि उन्हें विदेशी अधिग्रहण से बचाया जाए। अंतर-मंत्रालयी समूह (आईएमजी) तक ने सिफारिश की है कि दवा उद्यमों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की सीमा 100 फीसदी से घटाकर 49 फीसदी कर दी जाए। दूसरी तरफ योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह आहलूवालिया ने कहा है कि ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है और दवा उद्योग में 100 फीसदी एफडीआई को कहीं से कोई आंच नहीं आने दी जाएगी। आहलूवालियाऔरऔर भी

तीन माह तक लगातार घटने के अप्रैल 2011 में देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) 43 फीसदी बढकर 3.12 अरब डॉलर पर पहुंच गया। इससे पिछले साल इसी माह देश में कुल 2.17 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश हुआ था। एक अधिकारी ने बताया कि एफडीआई के मौजूदा आंकड़े वैश्विक और विशेष रूप से यूरोपीय अर्थव्यवस्था में सुधार को दर्शाते हैं। इस दौरान देश में मुख्य रूप से मॉरीशस, सिंगापुर, अमेरिका, ब्रिटेन, नीदरलैंड, जापान, जर्मनी औरऔरऔर भी