इस दुनिया में हम अकेले ही आए हैं और अकेले ही जाएंगे। हमें जो भी करना है, अकेले ही करना है। इसमें घर-परिवार, दोस्त या समाज का कोई अन्य सदस्य योगदान करता है तो यह उसकी मेहरबानी है। हमें इसके लिए उसका कृतज्ञ होना चाहिए।और भीऔर भी

कहते हैं कि दोस्त आईने जैसा होना चाहिए जो आपके हंसने पर हंसे और आपके रोने पर रोए। लेकिन ऐसे दोस्त से क्या फायदा जो आपका भ्रम नहीं मिटा सकता? आपको एक से अनेक नहीं बना सकता?और भीऔर भी

घर-परिवार से लेकर काम-धंधे तक स्वार्थों की दुनिया फैली है। इनमें कुछ गिने-चुने लोग ही होते हैं जो आपकी परवाह करते हैं। ऐसे हमदर्द दोस्त बड़े नसीब वालों को ही मिलते हैं। इसलिए इनकी कद्र जरूरी है।और भीऔर भी

जिंदगी में तमाम छोटी-छोटी चीजों से हमारा सुख व दुख निर्धारित होता है। इनमें से कुछ का वास्ता हमारे व्यक्तित्व, परिवार व दोस्तों से होता है, जबकि बहुतों का वास्ता सरकार व समाज के तंत्र से होता है।और भीऔर भी

जो भगवान का जितना बड़ा भक्त है, वो सच्चे दोस्तों से उतना ही महरूम होता है। बेचारा अंदर से निपट अकेला होता है। उसका अकेलापन दूर कीजिए। दोस्त बनिए। भगवान का भ्रम मिटता चला जाएगा।और भीऔर भी

अशोक लेलैंड। आजादी के बाद देश को आत्मनिर्भर बनाने के ख्वाब के साथ 1955 से सक्रिय कंपनी। मालिक हिंदुजा समूह। बस व ट्रक से लेकर डिफेंस व अन्य विशिष्ट कामों के लिए विशेष वाहन। पिछले ही महीने कंपनी हल्के वाहनों के सेगमेंट में ‘दोस्त’ के साथ उतरी है। अशोक लेलैंड का नाम दिखता है हर जगह। कम से कम इस ब्रांड के पांच लाख वाहन सड़कों पर। ए ग्रुप का शेयर। बीएसई-100 में शामिल। लेकिन हाल ऐसाऔरऔर भी

मैंने कुछ काम वर्ड को, कुछ एक्सेल को दे दिया। कुछ मोबाइल और लैपटॉप को बांट दिया। बाकी जो भी काम यंत्र कर सकते हैं, सभी को धीरे-धीरे बांट दूंगा। फिर मैं फुरसत से घूम-घूमकर दोस्त बनाऊंगा।और भीऔर भी