यहां कुछ भी अकारण नहीं होता। जो कुछ भी होता है, उसके पीछे कोई न कोई कारण जरूर होता है। यह हमारी ही सीमा है कि हम उस कारण को देख नहीं पाते। सुज़लॉन एनर्जी का शेयर बीते साल अप्रैल में 58.45 रुपए पर जाने के बाद गिरना शुरू हुआ तो गिरता ही चला गया। नए साल के पहले कारोबारी दिन 2 जनवरी को यह मुंह के बल 17.25 रुपए तक गिर गया। करीब नौ महीने मेंऔरऔर भी

पहले नाम बड़ा था – गुजरात हैवी केमिकल्स लिमिटेड। अब छोटे में जीएचसीएल लिमिटेड हो गया है। 1988 से चल रही कंपनी है। रसायनों से लेकर टेक्सटाइल्स तक में सक्रिय है। 2009-10 में 1213.96 करोड़ रुपए की बिक्री पर 140.85 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ कमाया था। बीते वित्त वर्ष 2010-11 में दिसंबर तक के नौ महीनों में उसकी बिक्री 1051.05 करोड़ और शुद्ध लाभ 91.18 करोड़ रुपए रहा है। अगर ठीक पिछले बारह महीनों की बातऔरऔर भी

जो कंपनी ठीक पिछले बारह महीनों में अपने हर शेयर पर 79.35 रुपए का शुद्ध लाभ कमा रही हो, जिसके शेयर की बुक वैल्यू (रिजर्व + इक्विटी / कुल जारी शेयरों की संख्या) 200.88 रुपए हो, जिसका पी/ई अनुपात पिछले साल भर से पांच, छह, सात कर रहा हो, फिर भी उसके शेयरों को पूछनेवाले न हों तो भारतीय शेयर बाजार की गली को अंधों की गली ही कहना ज्यादा ठीक होगा। या, बहुत हुआ तो यूंऔरऔर भी

नैवेली लिग्नाइट कॉरपोरेशन (एनएलसी) बढ़ रही है, लेकिन उसका शेयर ठहरा हुआ है। सार्वजनिक क्षेत्र की इस कंपनी ने इस साल जून की पहली तिमाही में 342.10 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ हासिल किया है जो साल भर पहले की इसी अवधि के शुद्ध लाभ 287.64 करोड़ रुपए से 18.93 फीसदी ज्यादा है। इससे पहले पूरे वित्त वर्ष 2009-10 में उसका शुद्ध लाभ 52 फीसदी बढ़ा था। उसका परिचालन लाभ मार्जिन (ओपीएम) अब 51.49 फीसदी हो गयाऔरऔर भी