एक तरफ वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने पिछले शुक्रवार को पेश बजट में पेट्रोलियम सब्सिडी को 25,000 करोड़ रुपए घटाकर डीजल के दाम बढ़ाने का इरादा साफ-साफ जाहिर कर दिया था। वहीं दूसरी तरफ इस शुक्रवार को हमारे पेट्रोलियम मंत्री एस जयपाल रेड्डी ने दावा किया कि सरकार का कोई इरादा डीजल को मूल्य नियंत्रण व्यवस्था से बाहर निकालने का नहीं है। रेड्डी ने राजधानी दिल्ली में सातवें एशियाई गैस भागीदारी सम्मेलन में संवाददाताओं से अगल सेऔरऔर भी

पेट्रोलियम मंत्री एस जयपाल रेड्डी ने संकेत दिया है कि सरकार तुरंत डीजल या रसोई गैस के दाम नहीं बढ़ाएगी, भले ही रुपए में कमजोरी से आयातित कच्चे तेल की लागत बढ़ रही है। उन्होंने गुरुवार को संसद भवन में संवाददाताओं से बातचीत के दौरान कहा, ‘‘रुपए में कमजोरी ने स्वाभाविक रूप से अप्रत्याशित दिक्कत पैदा कर दी है। इससे वित्त वर्ष 2011-12 में तेल कंपनियों की अंडर रिकवरी 1.32 लाख करोड़ रुपए रहेगी।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इसऔरऔर भी

अमेरिका में शेल गैस की खोज और दोहन में मिली सफलता के बाद दुनिया के तमाम देशों की तरह भारत ने भी अपनी पथरीली घाटियों में शेल गैस के भंडारों का पता लगाने का काम शुरू कर दिया है। हालांकि अभी तक कोई शेल गैस ब्लॉक आवंटित नहीं किया गया है। पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्री एस जयपाल रेड्डी ने बुधवार को राज्‍यसभा में एक लिखित उत्‍तर में यह जानकारी दी। उन्‍होंने बताया कि परम्‍परागत तेल औरऔरऔर भी

हमारी राजनीतिक पार्टियां इस कदर अंधी हैं कि उन्हें दिखाई नहीं देता कि इस साल केवल जुलाई-सितंबर की तिमाही में ही सरकारी तेल कंपनियों को 14,079.30 करोड़ रुपए का घाटा हुआ है। बुधवार को इंडियन ऑयल ने सितंबर तिमाही के नतीजे घोषित किए तो पता चला कि बिक्री साल भर पहले की तुलना में 15.81 फीसदी बढ़कर 89145.55 करोड़ रुपए हो जाने के बावजूद उसे 7485.55 करोड़ रुपए का घाटा उठाना पड़ा है। इससे पहले दो अन्यऔरऔर भी

पेट्रोलियम मंत्रालय ने डीजल की दोहरी मूल्य-नीति को खारिज करते हुए कहा कि यह व्यावहारिक नहीं है। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि उसकी घरेलू रसोई गैस सिलेंडर पर सब्सिडी समाप्त करने की कोई मंशा नहीं है। पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्री जयपाल रेड्डी ने आर्थिक संपादकों के सम्मेलन में पूछे गए सवाल पर कहा कि डीजल पर दोहरी मूल्य-नीति व्यावहारिक नहीं है। हम डीजल की दोहरी मूल्य प्रणाली शुरू नहीं कर सकते हैं। इससे बाजारऔरऔर भी

पेट्रोलियम मंत्री एस जयपाल रेड्डी ने कुर्सी का धर्म निभाते हुए पेट्रोलियम तेल की मार्केटिंग में लगी सरकारी कंपनियों की शिकायत ऊपर तक पहुंचा दी है। उन्होंने मंगलवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मिलकर डीजल व रसोईं गैस के दाम बढ़ाने का फैसला जल्द करने की मांग की। ये दोनों उत्पाद राजनीतिक व आर्थिक दृष्टि से संवेदनशील माने जाते हैं। रेड्डी ने पिछले हफ्ते इसी मामले में वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी से भी मुलाकात की थी। गौरतलबऔरऔर भी

यह वाकई बहुत बुरी बात है कि बिजनेस चैनल अब दर्शकों की भावनाओं के साथ खेलने लगे हैं। एक बिजनेस चैनल और उससे जुड़ी समाचार एजेंसी ने खबर फ्लैश कर दी कि सरकार पेट्रोलियम तेलों पर फिर से नियंत्रण कायम करने जा रही है। कितनी भयंकर बेवकूफी की बात है? सुधारों को पटलने का सवाल कहां उठता है? यह तो तभी हो सकता है जब सीपीएम केंद्र सरकार की लगाम थाम ले! स्वाभाविक रूप से पेट्रोलियम मंत्रीऔरऔर भी

कच्चा तेल आज दो भूमिकाओं में है। एक तरह जहां वह एक भौतिक जिंस है, वहीं दूसरी तरफ वह निवेश के लिए एक वित्तीय माध्यम या आस्ति भी बन चुका है। अगर हमें इसके मूल्यों में आनेवाले उतार-चढ़ाव और सही मूल्य के अंतर को समझना है कि हमें कच्चे तेल के भौतिक व वित्तीय बाजार के अंतर्संबंध को समझना होगा। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री जयपाल रेड्डी ने मंगलवार को रियाद (सऊदी अरब) में अंतरराष्ट्रीय उर्जा फोरम की विशेषऔरऔर भी