भारत से दो साल बाद मुक्त होनेवाला चीन छह दशकों के सफर में तमाम क्षेत्रों में आगे बढ़ चुका है। फिर भी लोकतंत्र ही नहीं, सोने की मांग तक में वह भारत को मात नहीं दे सका। लेकिन भारत अब पहली बार अपनी इस पारंपरिक श्रेष्ठता में भी चीन से पिछड़ गया है। विश्व स्वर्ण परिषद (डब्ल्यूजीसी) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक साल 2011 की आखिरी तिमाही (अक्टूबर से दिसंबर) में भारत में सोने की खपत 173औरऔर भी

इधर हर कोई सोने में चल रही तेजी की वजह यूरोप के ऋण संकट और अमेरिका में आई आर्थिक सुस्ती को बता रहा है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स के बाजार विश्लेषक क्लाइड रसेल का कहना है कि इसकी असली वजह दुनिया के केंद्रीय बैंकों की खरीद के अलावा भारत व चीन के ग्राहकों की बढ़ी हुई मांग है जहां सोना खरीदना मुद्रास्फीति के बचाव के साथ-साथ स्टेटस सिम्बल भी बनता जा रहा है। क्लाइड रसेल काऔरऔर भी

इस साल जून तक के छह महीनों में देश में सोने की मांग 365 टन रही है जो पिछले साल की पहली छमाही की मांग 188.4 टन से 94 फीसदी अधिक है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की तरफ से बुधवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक चालू साल 2010 की पहली छमाही में भारत में सोने के निवेश में 264 फीसदी की जबरदस्त वृद्धि हुई है। साल 2009 में जून तक सोने में किया गया निवेश 25.4 टन था,औरऔर भी