सुखी वही है जिसकी दृष्टि सम्यक है, जो स्थिरता के साथ गति को भी देखता है, जो वर्तमान के साथ-साथ उसके भीतर पनपते भविष्य को समझने का माद्दा रखता है, जो अतीत के मोह में चिपक कर वर्तमान व भविष्य के प्रति शंकालु नहीं रहता। (more…)
Jul 182012
सुखी वही है जिसकी दृष्टि सम्यक है, जो स्थिरता के साथ गति को भी देखता है, जो वर्तमान के साथ-साथ उसके भीतर पनपते भविष्य को समझने का माद्दा रखता है, जो अतीत के मोह में चिपक कर वर्तमान व भविष्य के प्रति शंकालु नहीं रहता। (more…)
दुर्भाग्य कहीं आसमान से नहीं टपकता। वह तो हमारे ही कर्मों का नतीजा होता है। हां, वह अपने साथ इतनी चासनी लेकर ज़रूर आता है कि कुछ सोचे-समझे बिना हम उसके स्वागत के लिए लपक पड़ते हैं। (more…)