अगर आप शेयर बाज़ार में अच्छी तरह ट्रेड करना चाहते हैं तो आपको मानव मन को अच्छी तरह समझना पड़ेगा। आखिर बाज़ार में लोग ही तो हैं जो आशा-निराशा और लालच व भय जैसी तमाम मानवीय दुर्बलताओं के पुतले हैं। ये दुर्बलताएं ही किसी ट्रेडर के लिए अच्छे शिकार का जानदार मौका पेश करती हैं। निवेश व ट्रेडिंग के मनोविज्ञान पर यूं तो तमाम किताबें लिखी गई हैं। लेकिन उनके चक्कर में पड़ने के बजाय यही पर्याप्तऔरऔर भी

भारतीय गणतंत्र 73 साल का हो गया। देश के सभी समझदार व संवेदनशील नागरिकों को परखने की ज़रूरत है कि अब तक नियमित अंतराल पर बराबर चुनावों से गुजरता हमारा लोकतंत्र सत्ता तंत्र के मजबूत होते जाने का सबब बना है या सचमुच भारतीय लोक या गण शक्तिमान बना है। हमें यह भी देखना चाहिए कि प्राचीन भारत में गणतंत्र का क्या स्वरूप था, आज कैसा है और कैसा होना चाहिए। इन मसलों पर संक्षिप्त चर्चा करनेऔरऔर भी