सात कदमों से निपटा दें तीन चुनौतियां!
हम शेयर बाज़ार में जो भी सौदे करते हैं, उसके लिए अंततः खुद ज़िम्मेदार होते हैं। इसे स्वीकार करेंगे, तभी अपने तौर-तरीकों और रणनीति को आगे सुधार सकते हैं। लेकिन यहां तो हर कोई सफलता का श्रेय खुद लेता है, जबकि नाकामी के लिए अपने अलावा हर किसी को दोषी ठहरा देता है। इंटरनेट सुस्त था, ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म सही नहीं था, बीवी-बच्चों या कुत्ते ने परेशान कर रखा था, सलाह देनेवाला गलत निकला। दरअसल, हम गलत साबितऔरऔर भी
कहीं भरोसा नहीं, अपना दीपक खुद बनें
यह हमारे ही दौर में होना था। एक तरफ शेयर बाज़ार में अल्गो ट्रेडिंग के बाद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस या एआई की धमक। दूसरी तरफ ट्रेडिंग व निवेश सिखानेवाला कोई शख्स कह रहा है, “कर्ता कृष्ण और दाता राम हैं। हम तो निमित्र मात्र हैं।” यह कैसा विरोधाभास है? लेकिन यह विचित्र, किंतु सत्य है। ऊपर से भोले-भाले व लालच में फंसे लोगों के लिए डिफाइन येज और नॉयज़लेस चार्ट के ‘प्वॉइंट्स एंड फिगर्स’ जैसे धांसू जुमले। इनकेऔरऔर भी
खेल खिलाड़ियों का, पंगा लेना खतरनाक
शेयर बाज़ार का उठना-गिरना कभी भी अर्थव्यवस्था की सेहत का पैमाना नहीं होता। एफआईआई अगर हमारे शेयर बाज़ार में निवेश करते हैं तो सिर्फ इसलिए कि उन्हें यहां से मुनाफा कमाने की गुंजाइश दिखती है। यही नहीं, बाकी जो भी शेयर बाज़ार में धन लगाते हैं, उनका एकमात्र मकसद फटाफट ज्यादा से ज्यादा धन कमाना है। अर्थव्यवस्था का मजबूत या कमज़ोर होना सिर्फ खरीदने-बेचने का माहौल बनाता है, इससे ज्यादा कुछ नहीं। एफआईआई इस मायने में बड़ेऔरऔर भी
प्रतिमाह ट्रेडिंग से ₹1 लाख कमाएं कैसे!
शेयर बाज़ार के रिटेल ट्रेडर को न बहुत ज्यादा, न बहुत कम कमाने का लक्ष्य बनाना चाहिए। आज के दौर में ‘साईं इतना दीजिए, जामे कुटुम्ब समाए’ का भी लक्ष्य बनाएं तो घर-परिवार चलाने के लिए महीने में कम से कम एक लाख रुपए तो चाहिए ही चाहिए। एक लाख रुपए के लिए महीने में 20 दिन की ट्रेडिंग में प्रतिदिन 5000 रुपए का औसत निकलता है। यह औसत है क्योंकि व्यवहार में हो सकता है किऔरऔर भी






