अगर आपको लगता है कि बजट आपके लिए है, गांव व गरीब के लिए है, नौजवान, महिलाओं, किसानों और बुजुर्गों के लिए है, नौकरी कर रहे या छोटी-मोटी कमाई करनेवाले मध्यवर्ग के लिए है तो आप गफलत में हैं। अगर आपको कहीं से यह लगता है कि बजट समाज कल्याण, शिक्षा व स्वास्थ्य के लिए है, तब भी आप गफलत में हैं। यह बजट केवल और केवल सरकार के लिए है। इसमें अगर दरअसल किसी का कल्याणऔरऔर भी

बंद है मुठ्ठी तो लाख की, खुल गई तो फिर खाक की। उंगली पर जब तक काली स्याही का निशान न लगे, तब तक सरकार में बैठी और उससे बाहर की पार्टियां उसकी कीमत लगा रही हैं। एक बार निशान लग गया, फिर पांच साल तक कौन पूछनेवाला! अभी गिनने को है कि 90 करोड़ मतदाता, जिसमें से 50 करोड़ युवा मतदाता और उसमें से भी 15 करोड़ ऐसे जिन्होंने पिछले पांच सालों में मतदाता बनने काऔरऔर भी

आर्थिक विवेक कहता है कि किसानों की कर्जमाफी गलत है। रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल से लेकर देश के सबसे बड़े बैंक, एसबीआई की चेयरमैन अरुंधति भट्टाचार्य तक इसका विरोध कर चुकी हैं। लेकिन राजनीतिक विवेक कहता है कि चुनावी वादा फटाफट पूरा कर दिया जाए। इसलिए अगर योगी सरकार ने भाजपा के लोक संकल्प पत्र के वादे को पूरा करते हुए पहली कैबिनेट बैठक में ही पांच एकड़ तक की जोतवाले 94 लाख लघु वऔरऔर भी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’ को मंजूरी दे दी। यह योजना इसी साल खरीफ सीजन से लागू हो जाएगी। इस फैसले के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट किया, “यह एक ऐतिहासिक दिन है। मेरा विश्वास है कि किसानों के कल्याण से प्रेरित प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों के जीवन में बहुत बड़ा परिवर्तन लाएगी।” सरकार की तरफ से जारी सूचना में कहा गया है कि किसानों केऔरऔर भी