नई पेड सेवा

arthkaamtathastu marcalendar                                     अप्रैल कैलेंडर
Apr 042014
 

हमारी सोच यकीनन एकतरफा हो सकती है। लेकिन बाज़ार कभी एकतरफा नहीं होता। हम जब कोई शेयर खरीदने की सोचते हैं, तभी किसी को लगता है कि यह अब और नहीं बढ़ेगा, इसलिए इसे बेच देना चाहिए। इसी तरह बेचने वक्त भी सामने कोई न कोई खरीदार रहता है। यिन-यांग की इसी जोड़ी से सृष्टि [...]

Mar 072014
 

हम अक्सर जानकर नहीं, मानकर चलते हैं। जो जैसा है, उसे उस रूप नहीं, बल्कि जिस रूप में हम देखना चाहते हैं, वैसा देखते हैं। लग जाए, ऐसा होगा तो मान बैठते हैं कि वैसा ही होगा। ट्रेडिंग कोई आत्मपरक नहीं, बड़ी वस्तुपरक गतिविधि है। मन की पूर्वधारणा हमें सच नहीं देखने देती। नतीज़तन लड़ने [...]

Feb 072014
 

बाज़ार सोम को गिरा, मंगल को उठा, बुध को जस का तस पड़ा रहा। गुरु को खुला तो बढ़त के साथ। लेकिन अचानक 1.25% का गोता लगातार उठा तो थोड़ी बढ़त लेकर बंद हुआ। बाज़ार आखिर जाना कहां चाहता है? हम नहीं जानते। ट्रेडर को इससे मतलब भी नहीं होना चाहिए। उसका तो मकसद है [...]

Feb 042014
 

देश के ग्रामीण अंचलों में सूद पर सूद लेने का महाजनी चलन अब भी जारी है। कई जगह तो इस काम में कांग्रेस और बीजेपी जैसी स्थापित पार्टियों के सांसद व विधायक तक लगे हुए हैं। लेकिन शहरी इलाकों में बैंक भी इस काम को बखूबी अंजाम दे रहे हैं। वे इसके लिए सूद पर [...]

Jan 302014
 

शेयरों के भाव और कंपनी नतीजों में क्या आज और अभी का सीधा संबंध है? अगर होता तो कल पंद्रह तिमाहियों के बाद पहली बार शुद्ध लाभ में बढ़ोतरी, वो भी शानदार 115% की, हासिल करने के बावजूद भारती एयरटेल का शेयर 1.52% गिर नहीं गया होता! यहीं काम करती हैं उम्मीदें। एयरटेल इसलिए गिरा [...]

Jan 212014
 

न तो दुनिया और न ही शेयर बाज़ार हमारी सदिच्छा से चलता है। लेकिन हम अपनी इच्छाएं थोपने से बाज नहीं आते। सोच लिया कि फलानां शेयर बढेगा तो दूसरों से इसकी पुष्टि चाहते हैं। वही टेक्निकल इंडीकेटर पकड़ते हैं जो हमारी धारणा को सही ठहराते हों। कोई इंडीकेटर उल्टा संकेत देता है तो हम [...]

Dec 052013
 

कल एग्ज़िट-पोल आ ही रहे थे कि एक अभिन्न मित्र का फोन आया। बोले, मुझे लगता है कि दिल्ली में आम आदमी पार्टी को छब्बीस सीटें मिलेंगी। मैंने पूछा, कैसे? बोले, कुछ नहीं, बस मेरा अंतर्मन कह रहा है। लेकिन यह आपके अंतर्मन की नहीं, औरों का मन समझने की बात है। बोले, इन्ट्यूशन भी [...]

Sep 082013
 

शेयर बाज़ार भले ही पिछले हफ्ते मंगल को छोड़कर हर दिन बढ़ा हो। पर सच यही है कि हमारी अर्थव्यवस्था की हालत अच्छी नहीं है। फिर, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बांड खरीद घटने या रुकने से भारत समेत दुनिया भर के बाज़ार गिर सकते हैं। ऐसी सूरत में हमें उन्हीं कंपनियों में निवेश करना चाहिए [...]

Aug 052013
 

पैसा बड़े-बड़ों को हिलाकर रख देता है। 50% डिस्काउंट मिले तो हम दोगुनी खरीदारी कर डालते हैं। साथ में कुछ मुफ्त ऑफर हो तो महंगी चीज़ तक खरीद डालते हैं। पैसा हमें भावनाओं की ऐसी भंवर में उलझा देता है जहां हम तर्कसंगत फैसले नहीं कर पाते, जबकि ट्रेडिंग तर्कसंगत व्यवहार की मांग करती है। [...]