जहां गोदामों में लाखों टन अनाज होने के बावजूद करोड़ों लोग भूखे सोते हों, जहां प्रतिभाओं की खान के बावजूद काम के काबिल लोग नहीं मिलते, उस व्यवस्था को हम सच्चा लोकतंत्र कैसे कह सकते हैं।और भीऔर भी