कितने मासूम हैं हम कि अपनी ही कहानी देखकर रो पड़ते हैं और सामनेवाले की तारीफ में कह डालते हैं, वाह! क्या दिखाया है। कब रुकेगा हमारी कथा हम्हीं को दिखाकर रुलाने का यह निर्मम सिलसिला?और भीऔर भी