हम सभी खुद को भीड़ से अलग समझते हैं। लेकिन आफत या अफरातफरी की हालत में भीड़ जैसा ही बर्ताव करते हैं। जब तक हम भीड़-सा बर्ताव करते रहेंगे, तब तक शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग से नहीं कमा सकते। यह कोई दुस्साहसी काम नहीं है जिसमें लीक छोड़कर भीड़ से उलटा चलना पड़ता है। लेकिन यहां भीड़ से ऊपर उठना ज़रूरी है ताकि हम भीड़ की चाल को भांप सके। टेक्निकल एनालिसिस इसमें मददगार है। अब आगे…औरऔर भी

आप भीड़ का हिस्सा बने रहे, उसी तरह सोचते रहे तो हमेशा वोटर और उपभोक्ता ही बने रहेंगे, नेता-विजेता कभी नहीं बनेंगे। कंपनियां और राजनीतिक पार्टियां आपकी सोच पर अपना साम्राज्य खड़ा करती रहेंगी। आपको अपना बिजनेस खड़ा करना है तो भीड़ की सोच से ऊपर उठना पड़ेगा, भीड़ की सोच से खेलना पड़ेगा। जो ट्रेडर इस खेल में पारंगत हो जाता है, वो ऐश करता है। बाकी आते हैं, क्रैश कर जाते हैं। अब चलें आगे…औरऔर भी

धीरे-धीरे यह सेवा लेनेवालों की संख्या बढ़ रही है तो हल्की-सी घबराहट के साथ जिम्मेदारी और जवाबदेही का भाव भी बढ़ता जा रहा है। जब लोग आप पर भरोसा करने लगे तो उनके प्रति आपकी जवाबदेही बढ़ जाती है। अपनी तरफ से सच्ची सेवा देने का संकल्प है। लेकिन एक बात गांठ बांध लें कि मैं या कोई दूसरा आपको पैसे बनाकर नहीं देगा। पैसे के मामले में किसी की नहीं, सिर्फ अपनी सुनें। अब टिप्स आजऔरऔर भी

ठीक आज की तारीख को साल भर पहले इसी कॉलम में हमने नैटको फार्मा में निवेश की सलाह दी थी। तब उसका शेयर 340 रुपए चल रहा था। इसके बाद 20 दिसंबर 2012 को वो 505 रुपए तक चला गया और अभी 430 रुपए चल रहा है। इतना नीचे आने के बाद भी 26.47 फीसदी का रिटर्न। यह है शेयर बाज़ार में अच्छी कंपनियों में निवेश का फायदा। इसे कहते हैं कंपनी के बढ़ने के साथ निवेशऔरऔर भी

नैटको फार्मा मध्यम आकार की दवा कंपनी है। एक्टिव फार्मा अवयव (एपीआई), फॉर्मूलेशन और कांट्रैक्ट मैन्यूफैक्चरिंग सेवाओं का बिजनेस करती है। देश में कैंसर संबंधी दवाएं बनाने की अग्रणी कंपनी है। 1981 में आंध्र प्रदेश से शुरुआत की। 2008 तक अमेरिका पहुंच गई। 2011 में उसने अमेरिकी कंपनी लिवोमेड के साथ मिलकर एक संयुक्त उद्यम बना डाला जो ब्राज़ील के लिए दवाएं बनाता व बेचता है। इसी महीने भारत सरकार के पेटेंट निकाय ने एक ऐतिहासिक फैसलेऔरऔर भी