इंडसइंड बैंक, लगता है जैसे सीधे सिंधु घाटी सभ्यता से निकला चला आ रहा हो। ऊपर से हिंदुजा समूह से वास्ता। 1994 में शुरुआत हुई अनिवासी भारतीयों से जुटाई गई 100 करोड़ रुपए की पूंजी के साथ, जिसमें से 60 करोड़ रुपए प्राइवेट प्लेसमेंट और बाकी 40 करोड़ रुपए सीधे सहयोग से आए। बैंक लगातार बढ़ रहा है। बड़े ग्राहकों के चुनिंदा समूहों को पकड़ने की उसकी रणनीति है। मसलन, देश के दोनों प्रमुख स्टॉक एक्सचेंजों बीएसईऔरऔर भी

विदेश में बसे भारतीयों ने बीते वित्त वर्ष 2010-11 के दौरान देश में 56 अरब डॉलर की रकम भेजी है। यह इससे पिछले साल की तुलना में दो अरब डॉलर अधिक है। प्रवासी भारतीय मामलों के मंत्री वायलार रवि ने शुक्रवार को राजधानी दिल्ली में खाड़ी क्षेत्र के मिशन प्रमुखों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि देश में 2010-11 में 55.9 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा विदेश में बसे भारतीयों नेऔरऔर भी

विदेश कमाने गए भारतीयों द्वारा भेजा जाने वाला आधे से ज्यादा धन देश के ग्रामीण इलाकों को जाता है जो वहां आर्थिक बदलाव और वित्तीय समावेश में योगदान करता है। मनी ट्रांसफर की सेवाएं देनेवाली फर्म वेस्टर्न यूनियन के प्रबंध निदेशक अनिल कपूर के मुताबिक बीते एक दशक में वेस्टर्न यूनियन व इंडिया पोस्ट के जरिए 6.5 अरब डॉलर का धन भारत आया। उनका कहना है कि कंपनी के 55 फीसदी केंद्र अर्ध-शहरी या ग्रामीण इलाकों मेंऔरऔर भी

मरने की कगार पहुंच गए इंटरेस्ट रेट फ्यूचर्स (आईआरएफ) या ब्याज दर वायदा कारोबार में सरकार ने एक बार फिर जान डालने की कोशिश की है। रिजर्व बैंक और सेबी से सर्कुलर जारी कर 91 दिनों के ट्रेजरी बिलों में आईआरएफ सौदों की इजाजत दे दी है। हालांकि इसका सैद्धांतिक फैसला रिजर्व बैंक ने 21 अप्रैल को पेश चालू वित्त वर्ष 2010-11 की मौद्रिक नीति में ही कर लिया था। सोमवार को देर शाम जारी सर्कुलर मेंऔरऔर भी

चालू खाते के बढ़ते घाटे से परेशान सरकार देश में विदेशी पूंजी को खींचने की हरचंद कोशिश कर रही है। इसी के तहत 2011-12 के बजट में जहां कॉरपोरेट बांडों को विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की निवेश सीमा बढ़ाकर 40 अरब डॉलर कर दी गई है, वहीं म्यूचुअल फंडों को अपनी इक्विटी स्कीमों में सीधे विदेशी निवेशकों से अभिदान या सब्सक्रिप्शन लेने की इजाजत दे दी गई है। वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने यह घोषणा करते हुएऔरऔर भी

वित्त राज्यमंत्री एसएस पलनमणिक्कम द्वारा राज्यसभा में दिए गए लिखित उत्तर के मुताबिक दुनिया के तमाम देशों ने अनिवासी भारतीयों के काले धन के बारे में भारत सरकार को जानकारी दे दी है। जर्मनी ने लीस्टेंस्टाइन के एलजीटी बैंक में भारतीय नागरिकों के गुप्त खातों की जानकारी भी दे दी है। इस तरह मिली सारी सूचनाओं के आधार पर चेन्नई, दिल्ली मुंबई और कोलकाता में अभी तक 18 मामलों का एसेसमेंट किया गया है। इनसे जुड़ी कुलऔरऔर भी