मई कैलेंडर

Apr 212012
 

मूल्य वो है जो कंपनी के कर्मों से बनता है और भाव वो है जो लोग उसे देते हैं। खरीदने-बेचने वाली शक्तियों के असल संतुलन से ही निकलता है भाव। हो सकता है कि कंपनी बहुत अच्छा काम कर रही हो। उसका धंधा बढ़ रहा हो। लाभप्रदता भी बढ़ रही हो। फिर भी बाजार के [...]

Jan 092011
 

हमारी नजरों में चढ़े हो तभी तो इतने बड़े हो। समझ बदल गई, अहसास बदल गया और हमने अपनी नजरों से गिरा दिया तो कहीं के नहीं रहोगे भाई। फिर काहे इतना इतराते हो, शान बघारते हो! (more…)

Nov 032010
 

कोई आपकी सूरत या सीरत में अपना खुदा देखता है तो देखने दीजिए। उसे खुशफहमी है या गलतफहमी, इससे आपको क्या! हां, अगर आप उसकी अपेक्षाओं को पूरा करने की कोशिश करें तो इसमें आपका ही भला है। (more…)