निफ्टी की दशा-दिशा [शुक्रवार 22 सितंबर 2017] अंतिम रुख⬇ शाम: 3.30 बजे

पिछला बंद शुक्र का उच्चतम शुक्र का न्यूनतम शुक्र का बंद वास्तविक दायरा
100121.90 10095.05 9952.80 9964.40 9955/10095

सपोर्ट और रजिस्टेंस नहीं करते मदद

 Posted by at 08:13  Comments Off on सपोर्ट और रजिस्टेंस नहीं करते मदद
Sep 222017
 

जब आप यह समझ जाते हैं कि बाज़ार में आपके सौदों या सक्रियता पर खबरों या सूचनाओं का प्रभाव आपके मन में जमी धारणाओं के हिसाब से पड़ता है, तब आप खरीदने या बेचने के सही मौके पकड़ने के लिए यह तलाशने लगते हैं कि भावों के चार्ट पर सच्ची मांग व सप्लाई कहां और […]

अक्सर फंसते गलत खरीद के ट्रैप में

 Posted by at 08:10  Comments Off on अक्सर फंसते गलत खरीद के ट्रैप में
Sep 212017
 

खबर या सूचना को अपनी मान्यता या मन में बैठे सिस्टम की इस कसौटी पर आंकना चाहिए कि वह बाज़ार में स्टॉक की मांग व सप्लाई की सही रिश्ते में कहां फिट बैठती है। अगर आप यह सुनिश्चित कर लें तो वहां खरीदने के ट्रैप में कभी नहीं फंसेंगे जहां सप्लाई मांग से कहीं ज्यादा […]

फोकस रखना केवल शेयर के भाव पर

 Posted by at 08:12  Comments Off on फोकस रखना केवल शेयर के भाव पर
Sep 202017
 

बाज़ार में आनेवाली हर खबर और सूचना हमारी मान्यताओं से होकर गुजरती है। उससे उपजे विचार या नजरिए के आधार पर उनका हिसाब-किताब करते है। उसके बाद तय होता है कि हम क्या करेंगे। शेयर बाज़ार की ट्रेडिंग हम दो ही काम करते हैं, खरीदना या बेचना। ऐसे में अगर हम बाज़ार से बराबर कमाना […]

नियम बनाते हैं, मन मानने नहीं देता

 Posted by at 08:09  Comments Off on नियम बनाते हैं, मन मानने नहीं देता
Sep 192017
 

अक्सर हम ट्रेडिंग के नियम व अनुशासन तो बना लेते हैं। लेकिन उनका पालन नहीं करते क्योंकि हमारी मान्यताएं उसके आड़े आ जाती हैं। नियम कुछ कहता है, जबकि हमारे मन में बैठी धारणाएं हमें कहीं और खींचकर ले जाती हैं। इस आंतरिक खींचतान को निपटाने में वक्त लगता है। तब तक हमें बाज़ार में […]

भ्रमों के जाल से खुद को निकालें कैसे

 Posted by at 08:14  Comments Off on भ्रमों के जाल से खुद को निकालें कैसे
Sep 182017
 

जिस पल हमें अहसास हो जाता है कि मन में बैठी मान्यताएं व धारणाएं शेयर बाज़ार में हमारी निवेश या ट्रेडिंग की रणनीति तय कर रही हैं, उसी पल हम उनको लेकर सतर्क हो जाते हैं और उन्हें बाज़ार की वास्तविकता के माफिक ढालने लगते हैं। अगर आपको वाकई सच की तलाश है तो अपने […]

मान्यता को ढालें हकीकत के माफिक

 Posted by at 08:14  Comments Off on मान्यता को ढालें हकीकत के माफिक
Sep 152017
 

मन है तो मान्यताएं रहेंगी। लेकिन शेयर बाज़ार से बराबर कमाने के लिए हमें उन्हें वास्तविकता के माफिक ट्यून करना होता है। कोई शेयर तभी बढ़ता है जब उसका भाव ऐसे स्तर पर होता है जहां सप्लाई की तुलना में मांग काफी ज्यादा हो। हालांकि आम मान्यता यह है कि हम चढ़े हुए शेयरों को […]

ब्रोकरेज रिपोर्ट से भाव का क्या रिश्ता

 Posted by at 08:15  Comments Off on ब्रोकरेज रिपोर्ट से भाव का क्या रिश्ता
Sep 142017
 

जब कोई ब्रोकरेज फर्म किसी शेयर को खरीदने की रिपोर्ट निकालती है या कंपनी अच्छे नतीजे घोषित करती है तो ज़रूरी नहीं कि बाज़ार में उस शेयर की मांग बढ़ जाए और भाव चढ़ जाएं। हो सकता है उसके शेयर पहले ही इतने ज्यादा खरीदे जा चुके हों कि अच्छी खबर के आते ही लोग […]

बाज़ार का सिग्नल ठीक, बाकी फालतू

 Posted by at 08:08  Comments Off on बाज़ार का सिग्नल ठीक, बाकी फालतू
Sep 132017
 

आम तौर पर बाज़ार में खरीदने व बेचने के दो तरह के सिग्नल रहते हैं। पहला सिग्नल खुद बाज़ार देता है जो मांग व सप्लाई की स्थिति पर आधारित है और भावों व उनके चार्ट पर झलकता है। दूसरे सिग्नल में ब्रोकरेज़ व एनालिस्टों की रिपोर्ट, सकारात्मक, नकारात्मक खबरें, डाउनग्रेड व अपग्रेड जैसी बाकी सारी […]

बाज़ार में होते भांति-भांति के सिग्नल

 Posted by at 08:12  Comments Off on बाज़ार में होते भांति-भांति के सिग्नल
Sep 122017
 

शेयर बाजार में एक ही समय खरीदने और बेचने के भांति-भांति के सिग्नल चलते हैं। ये खबरों से लेकर टेक्निकल संकेतकों, कंपनी की घोषणाओं, ब्रोकरेज हाउसों के अपग्रेड या डाउनग्रेड जैसे अनेक रूप में होते हैं। इन सिग्नलों का मतलब दुनिया भर में लाखों ट्रेडर व निवेशक अपने मन में बैठी मान्यताओं व धारणाओं के […]

ट्रेडिंग के मनोविज्ञान को बनाएं सहज

 Posted by at 08:12  Comments Off on ट्रेडिंग के मनोविज्ञान को बनाएं सहज
Sep 112017
 

मनोविज्ञान अपने-आप में विज्ञान की एक शाखा है। मगर, ट्रेडिंग के मनोविज्ञान पर बहुत सारी किताबें लिखी गई है। इन किताबों को पढ़कर ऐसा लगता है जैसे कोई डॉक्टर पेट के एंजाइम वगैरह के अध्ययन के बाद कहे कि आपको भूख लगी। वहीं, आप तो बगैर कोई ऐसा अध्ययन या विश्लेषण किए ही बता सकते […]