केंद्रीय वित्त मंत्रालय में जुलाई 2017 से लेकर जुलाई 2019 तक आर्थिक मामलात के सचिव से लेकर वित्त सचिव तक रह चुके सुभाष चंद्र गर्ग ने मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पिछले ही महीने उनकी किताब, ‘वी आलसो मेक पॉलिसी’ का एक अंश अखबारों में सुर्खियां बन गया था जिसमें खुलासा किया गया था कि 14 सितंबर 2018 को एक बैठक में रिजर्व बैंक द्वारा केंद्र सरकार को धन देने से मना करने परऔरऔर भी

केंद्र सरकार के कामकाज में ई-भुगतान प्रणाली पूरी तरह अपना लिये जाने के बाद करीब दो करोड़ चेकों की जरूरत खत्म हो जाएगी। इससे केंद्रीय मंत्रालयों, प्रतिरक्षा और रेलवे विभाग द्वारा किया जा रहा 6 लाख करोड़ रुपए का भुगतान ऑनलाइन हो जाएगा। अभी रिजर्व बैंक ने इलेक्‍ट्रॉनिक क्लियरिंग सर्विस (ईसीएस), नेशनल इलेक्‍ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर (एनईएफटी) और रीयल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट (आरटीजीएस) जैसी इलेक्‍ट्रॉनिक भुगतान प्रणालियां चला रखी हैं। सरकार नकद-रहित लेन-देन का लक्ष्य हासिल करना चाहतीऔरऔर भी

अपना देश लगता है उलटबांसियों का देश है। आयात निर्यात जमकर बढ़ रहा है। इस साल अप्रैल से जुलाई के बीच निर्यात 54 फीसदी तो आयात 40 फीसदी बढ़ा है। इससे कंटेनरों को बंदरगाहों तक लाने-ले जाने वाली कंपनियों का धंधा भी बढ़ा है। लेकिन तमाम कार्गो कंपनियों के शेयर पिटे पड़े हैं। सरकारी कंपनी कंटेनर कॉरपोरेपशन (कॉनकोर) की हालत तो कुछ ज्यादा ही खराब है। धंधा बुरा नहीं है क्योंकि जून तिमाही में उसका शुद्ध लाभऔरऔर भी

अप्रैल के पहले हफ्ते से गेहूं की सरकारी खरीद चालू है। दिखाने के लिए सरकारी खरीद के लंबे-चौड़े लक्ष्य तय किए गए हैं। लेकिन सरकार इस दिशा में कुछ खास करने नहीं जा रही। गेहूं की सरकारी खरीद में एफसीआई समेत अन्य सरकारी एजेंसियां ढीला रवैया अपनाएंगी। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड समेत लगभग एक दर्जन राज्यों में एफसीआई गेहूं खरीद से दूर ही रहने वाली है। ये राज्य केंद्रीय पूल वाली खरीद में नहीं आते हैं।औरऔर भी

देश की खाद्यान्न सुरक्षा के लिए सरकार के पास न तो गोदाम हैं और न ही भंडारण क्षमता बढ़ाने की कोई पुख्ता योजना। भंडारण की किल्लत से भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) मुश्किलों का सामना कर रहा है। हर साल खुले में रखा करोड़ों का अनाज सड़ रहा है। इसके लिए सरकार अदालत की फटकार से लेकर संसद में फजीहत झेल चुकी है। लेकिन पिछले दो सालों से सरकार भंडारण क्षमता में 1.50 करोड़ टन की वृद्धि काऔरऔर भी

रोजगार के अवसरों की कमी के बीच छात्र समुदाय के लिए थोड़ी सुखद खबर है। अगले दो साल में बैंकिंग, अर्धसैनिक बलों, रेलवे व बीमा आदि क्षेत्रों में कई लाख पदों को भरे जाने की योजना है। इस वर्ष की पहली छमाही के लिए अब तक 50 हजार से अधिक पदों के विज्ञापन निकाले जा चुके हैं। भारतीय स्टेट बैंक ने विभिन्न स्तर पर 6113 पद, इलाहाबाद बैंक ने पीओ के 1500 पद, पंजाब नेशनल बैंक नेऔरऔर भी

भारतीय रेल के पास 10.65 लाख एकड़ जमीन है। इसका 90 फीसदी हिस्सा रेल महकमा खुद के कामकाज में इस्तेमाल करता है। उसकी बाकी 1.13 लाख एकड़ जमीन खाली पड़ी है। रेलवे का कहना है कि इस जमीन का प्राथमिक इस्तेमाल गेज बदलने, फ्रेट कॉरिडोर बनाने व ट्रैक की सर्विसिंग जैसे कामों में किया जाएगा। इससे बची इफरात जमीन का व्यावसायिक उपयोग होगा। इसके लिए बाकायदा साल 2005 में रेल भूमि विकास प्राधिकरण बनाया गया है। वहऔरऔर भी