सरकार की योजना है कि डाकखानों का इस्तेमाल उन इलाकों में बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध कराने की है, जो अभी तक इससे वंचित हैं। नए साल में इस योजना को अमली जामा पहनाए जाने की उम्मीद है। संचार मंत्रालय ने इस आशय का प्रस्ताव मंजूरी के लिए वित्त मंत्रालय के पास भेज दिया है। इस योजना के तहत 1.55 लाख डाकखानों से बैंकों का काम लेने का भी प्रस्ताव है ताकि ग्रामीण इलाकों में सरकार के वित्तीय समावेशऔरऔर भी

हमारे योजना आयोग ने ग्रामीण इलाकों में 26 रुपए की गरीबी रेखा नहीं बदली। लेकिन चीन ने तय किया है कि उसके गांवों में प्रतिदिन एक डॉलर यानी करीब 50 रुपए से कम कमाने वाले व्यक्ति को गरीब माना जाएगा। अभी तक उसकी गरीबी रेखा 55 सेंट थी जिसे अब 92% बढ़ा दिया गया है। विश्व बैंक ने गरीबी रेखा का अंतरराष्ट्रीय मानक 1.25 डॉलर रखा है और चीन अब इसके बेहद क़रीब है। लेकिन भारत अभीऔरऔर भी

औसत भारतीय अब भी कर्ज लेने से परहेज करता है। हम अपनी कुल सालाना खरीद का बमुश्किल एक फीसदी हिस्सा क्रेडिट कार्ड से पूरा करते हैं, जबकि दुनिया का औसत 12 फीसदी का है। दूसरी तरफ बैंकों की पहुंच ग्रामीण आबादी तक नहीं बन पाई है। गावों में उधार लेनेवाले 90 फीसदी से ज्यादा लोग स्थानीय सूदखोरों का सहारा लेते हैं। बैंक भी गांवों को उपेक्षित करते हैं। साल 2009 तक के आंकड़ों के अनुसार बैंकों नेऔरऔर भी