निफ्टी की दशा-दिशा [शुक्रवार 17 अगस्त 2018] शुरुआती रुख⬆ सुबह: 8.05 बजे

मंगल का बंद कल का उच्चतम कल का न्यूनतम कल का बंद संभावित दायरा
11435.10 11449.85 11366.25 11385.05 11355/11445

 

मन हो शांत, गणना यथार्थ आधारित

 Posted by at 08:22  Comments Off on मन हो शांत, गणना यथार्थ आधारित
Aug 172018
 

ट्रेडिंग में आपकी पूंजी लगी होती है, सारा जोखिम आप उठाते हो। इसलिए अंतिम फैसला भी शांत मन से पूरी व्यावहारिक व यथार्थपरक गणना के बाद आपका ही होना चाहिए। शांत मन और यथार्थपरक गणना की क्षमता हासिल करने में विपश्यना काफी मददगार हो सकती है। वह असल में बाहर से कुछ नहीं करती, बल्कि […]

बाहरी प्रभावों से मुक्ति मिले धीरे-धीरे

 Posted by at 08:16  Comments Off on बाहरी प्रभावों से मुक्ति मिले धीरे-धीरे
Aug 162018
 

विपश्यना साधना और उसका नियमित अभ्यास आपको न केवल अवचेतन में जड़ जमा चुकी निरर्थक धारणाओं से मुक्त करता है, बल्कि वह तमाम बाहरी प्रभावों के झांसे से भी निकालता है। लेकिन यह धीरे-धीरे होता है, अचानक किसी चमत्कार की तरह नहीं। रोजमर्रा के जीवन के साथ ही वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग में भी इसका […]

कोई भागमभाग नहीं, शांति से कमाई

 Posted by at 08:18  Comments Off on कोई भागमभाग नहीं, शांति से कमाई
Aug 142018
 

नहीं पता कि शेयर बाज़ार में सक्रिय कितने लोगों ने विपश्यना साधना अपनाई है। लेकिन एनाम ग्रुप के चेयरमैन वल्लभ भंसाली का नाम इस बाबत काफी चर्चित है। वे 1989 से विपश्यना कर रहे हैं। भारतीय शेयर बाज़ार के बेहद शांत व सफल कारोबारियों में शुमार हैं। अगर किसी को भागमभाग में फंसे बगैर पूरी […]

ट्रेडिंग में बड़े काम आती है विपश्यना

 Posted by at 08:22  Comments Off on ट्रेडिंग में बड़े काम आती है विपश्यना
Aug 132018
 

चेतन व अवचेतन मन के बीच की लौह दीवार को भेदने की बड़ी व्यावहारिक विद्या गौतम बुद्ध ने वैदिक शिक्षाओं को मथने के बाद गहन आत्मसाधना से खोजकर निकाली थी। इस विपश्यना साधना ने तब आम से लेकर खास, सभी लोगों का भला किया। लेकिन करीब 2500 साल पहले पुरोहितों ने इसे गायब कर दिया। […]

बाज़ार का जोखिम सधेगा धीरे-धीरे

 Posted by at 08:17  Comments Off on बाज़ार का जोखिम सधेगा धीरे-धीरे
Aug 102018
 

ट्रेडिंग इसलिए कर रहे हैं ताकि बाज़ार से कमा सकें। मगर पूंजी ही न रही तो कमाएंगे कैसे और किससे? इसलिए अपनी ट्रेडिंग पूंजी बचाकर चलनी है, यह लक्ष्य बहुत साफ होना चाहिए। इस लक्ष्य से जो भी भावनाएं भटकाती हैं, उनके प्रति आप जितना सचेत होते जाएंगे, पूर्वाग्रहों से मुक्त होते जाएंगे, उतना ही […]

कहां है उन्नीस पर बीस पड़ने का सूत्र

 Posted by at 08:16  Comments Off on कहां है उन्नीस पर बीस पड़ने का सूत्र
Aug 092018
 

नकारात्मक विचारों, मान्यताओं और भावनाओं की फांस से निकलकर जब आप जो जैसा है, उसे यथाभूत देखने में समर्थ हो जाते हो तो आपको अपने कर्म की कमियां खुद ही दिखने लग जाती हैं। तब प्रतिक्रिया करने के बजाय आप क्रिया को अधिक महत्व देते हो। दूसरों या हालात पर तोहमत लगाने के बजाय अपनी […]

आज व अभी में जीने से चमके ट्रेडिंग

 Posted by at 08:22  Comments Off on आज व अभी में जीने से चमके ट्रेडिंग
Aug 082018
 

कल और कल के बीच झूलने के बजाय आप जब आज और अभी में जीने लगते हो तब तमाम गिले-शिकवों, परेशानी और बिखरे-बिखरे रहने की स्थिति से मुक्त हो जाते हो। तब आपका ध्यान भटकता नहीं। आप हर काम पूरा ध्यान लगाकर करते हो और सार को पकड़कर थोथी चीजें उड़ा देते हो। तब आपका […]

मन को खींचकर ले आना वर्तमान में

 Posted by at 08:21  Comments Off on मन को खींचकर ले आना वर्तमान में
Aug 072018
 

आती-जाती सांस पर ध्यान लगाने से मन का भटकाव थमता जाता है। एहसास होने लगता है कि अतीत की यादों या भविष्य के ख्वाबों में भटकना मन की आदत बन चुकी है। धीरे-धीरे आप उसे खींचकर वर्तमान में लाते हो। फिर वर्तमान में जीने की आदत के साथ-साथ मन स्थितप्रज्ञ बनने लगता है, आपके विचार […]

सांसों पर ध्यान खोल देता बंद कपाट

 Posted by at 08:18  Comments Off on सांसों पर ध्यान खोल देता बंद कपाट
Aug 062018
 

अवचेतन मन में बैठी नकारात्मक धारणाओं, विचारों और भावनाओं से समय रहते कैसे निजात पा ली जाए, यह बड़ा अहम मसला है। उनसे मुक्ति न पाई गई तो वे बड़ी घातक हो सकती हैं। इसे रोकने का पहला उपाय है कि हम अपने अंतर्मन के प्रति सचेत हो जाएं। पता लगाएं कि हमारे अंदर जाने-अनजाने […]

खेल मान्यता, विचार और भावना का

 Posted by at 08:19  Comments Off on खेल मान्यता, विचार और भावना का
Aug 032018
 

हमारे अवचेतन दिमाग में गहरे पैठी मान्यताओं व धारणाओं से हमारे सचेत विचारों की लड़ी फूटती है और इन्हीं विचारों से भय, लालच, क्रोध, चिंता व संशय जैसी भावनाएं पैदा होती हैं। जब इस तरह की भावनाएं सक्रिय हो जाती हैं तो वे हमसे ऐसे काम करवाती हैं जिनके बारे में हमने सोच रखा था […]