तीन और भी तरीके हैं घाटा बांधने के
मीठा-मीठा गप्प, कड़वा-कड़वा थू। दांव से कितना मिलेगा, इस पर तो हम बल्ले-बल्ले करते हैं। लेकिन क्या दांव पर लगा है, इसे अक्सर भुलाए रहते हैं। शेयर बाज़ार में हम जैसे ही कोई ट्रेड करते हैं, रिवॉर्ड की संभावना के साथ रिस्क की आशंका चील की तरह उसके ऊपर मंडराने लगती है। सुमेरु पर्वत को कोई कृष्ण ही उंगली पर उठा सकता है। पर पक्का जान लें कि रिटेल निवेशक या ट्रेडर होने के नाते हम बाज़ारऔरऔर भी
मांग-सप्लाई चले, पर न दिखे साफ
सिद्धांत कहता है और सही कहता है कि किसी भी कंपनी के शेयर का मूल्य मूलतः दो चीजों से तय होता है। एक, भविष्य में उसके धंधे से होने वाला डिस्काउंटेड कैश फ्लो (शुद्ध लाभ) कितना रहेगा और दो, जोखिम-रहित आस्ति (सरकारी बांड) पर मिलने वाले रिटर्न की बनिस्बत शेयरधारक क्या रिस्क ले रहा है। स्टॉक का मूल्य या अंतर्निहित मूल्य खासतौर पर इन्हीं दो चीजों से तय होता है। लेकिन बाज़ार में उस स्टॉक का भावऔरऔर भी
5200 सलामत तो फिक्र नहीं खास
बीते शुक्रवार को इनफोसिस ने जो किया, वही इस शुक्रवार को रिलायंस इंडस्ट्रीज द्वारा किए जाने का अंदेशा है। इनफोसिस को पहले लगी 12.6 फीसदी चोट के ऊपर करीब 1.5 फीसदी का फटका आज और लग गया। शेयर 25 अगस्त 2011 को हासिल 2169 रुपए के न्यूनतम स्तर से थोड़ा ही दूर, 2339.35 पर बंद हुआ। अब बाजार में चर्चा चल निकली है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज का लाभ चौथी तिमाही में उम्मीद से लगभग 7 फीसदी कमऔरऔर भी
एक मनचले ने बैठा दिया चंचला को
अकेले इनफोसिस में इतना दम है कि वह पूरे बाजार को दबाकर बैठा सकता है। शुक्रवार को यह बात साबित हो गई। सेंसेक्स 238.11 अंक गिर गया, जिसमें से 201.82 अंक का योगदान अकेले इनफोसिस का था। वह भी तब, जब सेंसेक्स में इनफोसिस का योगदान 8.18 फीसदी है। सेंसेक्स में रिलायंस इंडस्ट्रीज का योगदान सबसे ज्यादा 9.44 फीसदी और आईटीसी का उससे कम 9.02 फीसदी है। इस तरह सेंसेक्स में वजन के मामले में इनफोसिस तीससेऔरऔर भी
नस-नस में नशा व अस्थिरता क्यों!
बड़ी जटिल सोच और संरचना है बाज़ार की। औदयोगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) के फरवरी के आंकड़े तो खराब ही रहे। मात्र 4.1 फीसदी औद्योगिक उत्पादन बढ़ा है फरवरी में। लेकिन इससे भी बड़ा सदमा यह था कि जनवरी में आईआईपी में 6.8 फीसदी बढ़त के जिस आंकड़े को लेकर खुशियां मनाई गई थीं, वह झूठा निकला। अब सीएसओ (केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय) का कहना है कि चीनी उद्योग ने जनवरी के बजाय नवंबर से जनवरी तक के आंकड़ेऔरऔर भी
सुनामी नहीं आई, झटका लग गया
बाजार बंद होते-होते साफ हो चुका था कि इंडोनेशिया में रिक्टर पैमाने पर 8.7 तीव्रता के भूकंप से भारत में किसी सुनामी का खतरा नहीं है। यह भी साफ होने लगा था कि इंडोनेशिया के जिस इलाके में भूकंप आया है, वहां से वो इलाका काफी दूर और अप्रभावित है, जहां से भारत की तमाम कंपनियां कोयला आयात करती हैं। लेकिन माहौल में डर छा चुका था और कोयला आयात करनेवाली तमाम भारतीय कंपनियों के शेयर गिरनेऔरऔर भी
गिरे या उठे, मिलेगा 35% साल में
बाजार में कोई दिशा नहीं नज़र आती। तेजड़िए और मंदड़िए अपने-अपने तीर-कमान और तर्क लेकर भिड़े हुए हैं। मंदड़ियों के पास शॉर्ट सौदे करने की तमाम वजहें हैं। जैसे, अर्थव्यवस्था का कामकाज ठीक नहीं है, जीडीपी घट रहा है, राजकोषीय घाटा बढ़ रहा है, कंपनियों का लाभार्जन दबाव में है और बराबर डाउनग्रेड हो रहे हैं। इन सबसे ऊपर उनकी पक्की राय है कि निफ्टी 4000 तक गिर सकता है और अगले छह महीनों में बाजार मेंऔरऔर भी
खेल तो लंबा है नोएडा टोल ब्रिज का
अच्छे लोग, बुरे लोग। अच्छी कंपनियां, बुरी कंपनियां। अब अगर आप निवेश के लिए किसी ईश्वर भुवन होटल्स जैसी गुमनाम कंपनी को चुनते हैं तो सचमुच ईश्वर ही आपका मालिक है। कंपनी आपकी बचत लेकर गधे के सिर से सींग की तरह गायब हो जाएगी। लेकिन क्या करें! हम तो फास्टफूड के आदी हो चुके हैं। सब कुछ पका-पकाया चाहिए। किसी ने बताया, टिप दी, खरीद लिया। डूब गए तो शेयर बाजार को लाख-लाख गालियां देने लगे।औरऔर भी


