सरकार ने पेट्रोल से लेकर डीजल, रसोई गैस और केरोसिन के दामों पर छाई धुंध को साफ करने के लिए ऑनलाइन जानकारी उपलब्ध करानी शुरू कर दी है। सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियां – इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम व भारत पेट्रोलियम ने पेट्रोल कीमतों के बारे में विस्तृत जानकारी पेट्रोलियम मंत्रालय संबद्ध पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल की वेबसाइट पर डालनी शुरू कर दी है। यहां कच्चे के आयातित मूल्य से लेकर अंडर-रिकवरी व सरकार की तरफ सेऔरऔर भी

इस साल जनवरी से जून तक के छह महीनों के दौरान कुल 117 सरकारी वेबसाइटें हैक कर विकृत कर दी गईं। यह जानकारी संचार व सूचना प्रौद्योगिकी राज्‍य मंत्री सचिन पायलट ने बुधवार को लोकसभा में एक प्रश्‍न के लिखित उत्‍तर में दी। उन्होंने बताया कि प्रभावित संगठनों व विभागों से हमले की प्रकृति व तरीके किस्‍म और हैकर द्वारा इस्‍तेमाल की गई कमजोरियों का विश्‍लेषण करने को कहा गया। उनसे हैक की गई वेबसाइटों का वेबऔरऔर भी

कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय ने देश की 1,55,392 कंपनियों को ब्लैक-लिस्ट कर दिया है। इसकी वजह यह है कि इन कंपनियों ने 2006-07 से लेकर अब तक किसी साल की बैलेंस शीट दाखिल नहीं की है। सरकार के इस कदम के बाद ये कंपनियां न तो बैंकों या वित्तीय संस्थाओं के कोई ऋण ले पाएंगी और न ही किसी के साथ कोई नया अनुबंध कर पाएंगी। यह जानकारी खुद कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय के सचिव डी के मित्तल नेऔरऔर भी

ई-पंचायत की अवधारणा को लागू करने के लिए केंद्र सरकार ने सभी राज्‍यों व केन्‍द्र-शासित क्षेत्रों को राष्‍ट्रीय पंचायत निदेशिका प्रोफाइलर तैयार करने की सलाह दी है। पंचायती राज मंत्रालय का सुझाव है कि हर पंचायत का एक विशिष्‍ट कोड होना चाहिए, क्‍योंकि सभी आवेदन इन विशिष्‍ट कोड पर आधारित होंगे। मंत्रालय का कहना है कि राज्‍यों को यह काम तुरंत पूरा कर लेना चाहिए। हालांकि अभी जीपीएस 2001 की जनगणना के कोड से मापे जाते हैं।औरऔर भी

हम कोई सामान खरीदने जाते हैं, पूरी तहकीकात करते हैं। कई दुकानों पर पूछते हैं। रिश्तेदारों व पड़ोसियों तक से पूछ डालते हैं। लेकिन शेयरों में निवेश हम झोंक में करते हैं। टिप्स की तलाश में लगे रहते हैं। हमारी इसी मानसिकता का फायदा उठाने के लिए इन दिनों तमाम वेबसाइटों से लेकर एसएमएस तक से टिप्स भेजे जाने लगे हैं। इधर फंडामेंटल्स मजबूती की बात उठने लगी तो कुछ एसएमएस फंडामेंटल बताकर ही निवेश की सलाहऔरऔर भी

केंद्रीय उपभोक्ता मामलात मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक नेशनल कंज्यूमर हेल्पाइन पर शिकायतें दर्ज कराने में दिल्ली के बाद सबसे ज्यादा संख्या उत्तर प्रदेश के ग्राहकों की है। हो सकता है कि इनमें सबसे ज्यादा योगदान दिल्ली से सटे नोएडा और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में पड़नेवाले उत्तर प्रदेश के इलाकों का है। अप्रैल 2011 में नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन को ग्राहकों की कुल 10,170 शिकायतें मिलींष। साथ ही वेबसाइट पर 639 शिकायतें ऑनलाइन दर्ज कराई गईं। कुलऔरऔर भी

संसद की उच्च सदन की आचार समिति ने कहा है कि राज्यसभा के सदस्यों की आस्तियों और धन का ब्यौरा वेबसाइट पर सार्वजनिक नहीं किया जा सकता है। समिति ने हालांकि कहा है कि कोई भी व्यक्ति संसद सदस्यों की परिसम्पत्तियों और देनदारियों के बारे में सम्पत्ति और देनदारी नियम, 2004 के तहत राज्यसभा के सभापति से लिखित में अनुमति लेकर जानकारी प्राप्त कर सकता है। सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत दी गई जानकारी में राज्यसभाऔरऔर भी

हर लिस्टेड कंपनी की वेबसाइट एकदम चौकस और अपडेट होनी चाहिए। नए वित्त वर्ष 2011-12 के पहले दिन यानी 1 अप्रैल 2011 से पूंजी बाजार नियामक संस्था ने इसे अनिवार्य नियम बना दिया है। इसके लिए बाकायदा लिस्टिंग समझौते में संशोधन किया गया है। हालांकि अभी तक स्थिति यह है कि बहुत सारी कंपनियों ने कई सालों से अपनी वेबसाइट पर दी गई सूचनाओं को अद्यतन नहीं किया है। इससे निवेशकों को कंपनी के बारे में सहीऔरऔर भी